मेरे खिलाफ भाजपा में शामिल होने के आरोप लगे, जबकि हकीकत कुछ और: आजाद

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को नकारते हुए कहा कि मुझ पर आरोप लगता हैं कि मैं भाजपा में शामिल हो रहा हूं जबकि हकीकत कुछ और है

 

By: rahul

Updated: 13 Sep 2021, 04:40 PM IST

जयपुर। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को नकारते हुए कहा कि मुझ पर आरोप लगता हैं कि मैं भाजपा में शामिल हो रहा हूं जबकि हकीकत कुछ और है, उन्होंने कहा कि अगर लोकतंत्र में प्रधानमंत्री और प्रतिपक्ष के नेता आपसी संबंध अच्छे होते है तो उसका अर्थ लोग अलग निकाल लेते हैं जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और विपक्ष के बीच बेहतर संबंध और विश्वास होना चाहिए तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।

आजाद ने आज सोमवार को विधानसभा में राष्‍ट्रमंडल संसदीय संघ की राजस्‍थान शाखा की ओर से आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में संसदीय प्रणाली और जन अपेक्षाएं विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि आज भारत में लोकतंत्र संकटकाल में गुजर रहा है। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों का दायित्व अधिक हो जाता है कि वे अपने दायित्वों को समझे और उसका निर्वहन ईमानदारी सेे करें तो निश्चित तौर पर लोकतंत्र मजबूत रहेगा। उन्होंने कहा कि मैने अपने किसी भी चुनाव में कभी विपक्ष के उम्मीदवार का नाम नहीं पूछा क्योंकि मुझे उसके खिलाफ नहीं बोलना था, हमें अपने कामों पर बोलना चाहिए।

राव के समय वाजपेयी से अच्छे रिश्ते—
पूर्व केन्द्रीय मंत्री आजाद ने कहा कि जब मैं पीएम नरसिम्हा राव सरकार में संसदीय कार्य मंत्री होता था तो प्रतिपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी से मेरे सम्बन्ध बहुत ही बेहतर थे। हमें आपसी समन्वय से काम करने का जो मौका उस वक्त मिला वह निश्चित तौर पर आज के लोकतंत्र में देखने को नहीं मिल रहा जो कि चिंता का विषय है।

जिला स्तर पर ले जाने की जरूरत—
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि लोकतंत्र की खूबियों और कमियों को अब जिला स्तर पर ले जाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों को भी बताना होगा कि लोकतंत्र में कानून कैसे बनता है और उसका क्रियान्वयन किस तरह होता है।

गांधी ने आम लोगों के लिए काम किया, इसीलिए लोग याद करते है—
आजाद ने महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि देश के लोग उन्हें सदियों बाद भी याद इसलिए रखते हैं कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने टाई और पेंट छोड़ी। उन्होंने सलाह दी कि जनप्रतिनिधि को अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी सही ढंग से निभाने चाहिए नहीं तो जब हम बुजुर्ग हो जाते हैं तो परिवार वाले पूछते हैं कि हमारे लिए आपने क्या किया। मैं एक बार मेरे बच्चों के स्कूल गया तो बेटे के दोस्तों ने कहा कि तेरे पापा जैसे लगते हैं, जबकि मैं खुद था।

शेखावत के खिलाफ प्रचार करने गया—

वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के बारे में संस्मरण सुनाते हुए कहा कि राजनीति में कटुता के लिए जगह नहीं होनी चाहिए, मेरे सबसे बेहतर संबंध रहे हैं। एक बार मैं पूर्व सीएम भैरोसिंह शेखावत के खिलाफ प्रचार करने उनके निर्वाचन क्षेत्र में जा रहा था। एयरपोर्ट पर ही शेखावत मिल गए, उन्होंने मुझसे कहा कि तुम कश्मीरी हो, गोश्त खाने वाले हो, उनका एक कार्यकर्ता निर्वाचन क्षेत्र में मिलेगा वह आपके लिए गोश्त लेकर आएगा। यह संबंधों की प्रगाढ़ता दिखाता है।

सांसद विधायक की जिम्मेदारी कानून बनाने की —
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारे आज विधायक और सांसद सबसे ज्यादा लाचार हैं। संविधान में हमाारी पहली जिम्मेदारी कानून बनाने की हैं। आज अमेरिका, यूके विकसित देशों में यह बातें इसलिए की जाती हैं, क्योंकि वहां विधायक, सांसद के पास पानी, बिजली, सड़क बनाने की सिफारिश के लिए कोई नहीं आता। हमारे देश में अलग दिक्कत है। हम गुलाम रहे और हमारी संपत्ति भी बाहर ले गए, इसलिए हमारे यहां संसाधनों की दिक्कत है। विधायक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की बुनियादी सुविधाओं के लिए सिफारिश करनी होती है।

विपक्ष में भी सिफारिश के लिए आते हैं लोग—
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारे यहां लोग सत्ता और विपक्ष नहीं देखते, सिफारिश करवाने आते ही रहते हैं। जब तक आप जीएंगे लोग उस विभाग से जुड़ी सिफारिश करवाने आएंगे। अगर कोई नेता किसी विभाग का मंत्री रह गया तो लोग उसके विपक्ष में होने के बाद भी सिफारिश करवाने आते हैं।

सीपी बोले, जनता की उम्मीदें बढी —

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा है कि संसदीय लोकतंत्र में जनता की नेताओं से उम्मीदें बढ़ी हैं। हमने जनता को शिक्षित नहीं किया। आज गांव का आदमी यह अपेक्षा करता है कि नाली का काम भी विधायक ही करेगा। राज्य कितनी ही नीति बना लें, लेकिन पंचायत काम नहीं करेगी तो कारगर नहीं होगी। देश की एकता के लिए संसदीय लोकतंत्र जरूरी है। इनमें प्रश्न खड़े हुए हैं उन्हें पूरा करना होगा। हमें यह सोचना होगा कि क्या कारण थे कि जेपी आंदोलन हुआ, अन्ना आंदोलन हुआ और अब किसान आंदोलन खड़ा हो गया है। हमें इसकी तह तक जाना होगा। यदि इन बातों को नहीं समझा गया तो हम जन अपेक्षाओं को कैसे पूरा करें।

कटारिया ने कहा,दल से ज्यादा देश जरूरी—
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि संसदीय प्रणाली से बेहतर कुछ नहीं है। हम सबका देश की भलाई और जनता की भलाई का ही लक्ष्य होना चाहिए। आज दल से बढकर देश होना चाहिए। हमारे लोकतंत्र में कभी चुनाव के नाम पर हिंसा नहीं होना बड़ी बात है। सत्तारूढ़ दल अपने कामों से जनता का हित करता है, जबकि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दे लाकर सदन में उठाता है, लेकिन विधानसभा में आकर हम पक्ष और विपक्ष हो जाते हैं। हमें देश के विकास के लिए सोचना चाहिए।

जनता में आई चेतना: लोढ़ा

सीपीए की राजस्थान शाखा के सचिव और विधायक संयम लोढ़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा के लिए गौरवपूर्ण बात है कि पिछले पौने तीन सालों में एक बार भी ऎसा मौका नहीं आया जब किसी प्रकार के हंगामे के कारण विधानसभा पूरे एक दिन के लिए स्थगित हुई हो। उन्होंने कहा कि आमजन में अपने अधिकारों के प्रति चेतना आई है। वे अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसी राजनीतिक दल पर निर्भर नहीं हैं। इस महत्त्वपूर्ण सेमिनार में विधायक, पूर्व विधायक सहित राज्य के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रोफेसर्स ने भाग लिया।

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