अलवर : घोड़ों में खतरनाक रोग की दस्तक...मौत की नींद सुलाया...हड़कंप

अलवर(Alwar) जिले में घोड़ों में फैलने वाली ग्लेंडर्स बीमारी(Glenders disease) ने दस्तक(Knock) दे दी है। इससे राजस्थान में पशुपालकों ओर पशुपालन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अश्व को दर्दरहित मौत के लिए(To painless death) अश्व मालिक को मनाया(Persuade Horse Owner) और उसके इंजेक्शन लगा कर उसे गड्ढा खोदकर दफना(Killed by injection) दिया।

By: sanjay kaushik

Updated: 30 Nov 2019, 02:06 AM IST

-अश्व मालिक को मनाया और इंजेक्शन लगा गड्ढा खोदकर दफना

-तहसीलदार की मौजूदगी में दिया गया कार्रवाई को अंजाम

-पशुपालकों और अफसरों में चिंता

-मनुष्यों में भी हो फैल सकता है संक्रमण

अलवर। अलवर(Alwar) जिले में घोड़ों में फैलने वाली ग्लेंडर्स बीमारी(Glenders disease) ने दस्तक(Knock) दे दी है। इससे राजस्थान में पशुपालकों ओर पशुपालन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अलवर जिले के शाहजहांपुर क्षेत्र के शहजादपुर गांव में एक घोड़े में ग्लेंडर्स रोग की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार को चिकित्सकों के दल ने तहसीलदार की मौजूदगी में एक अश्व को दर्दरहित मौत के लिए(To painless death) अश्व मालिक को मनाया(Persuade Horse Owner) और उसके इंजेक्शन लगा कर उसे गड्ढा खोदकर दफना(Killed by injection) दिया।

-ग्लेंडर्स रोग फैलने की आशंका

पशुरोग निदान केंद्र जिला प्रभारी डॉ. राजेश चौधरी, मुंडावर ब्लॉक पशुचिकित्सा प्रभारी डॉ. हवाङ्क्षसह एवं जालावास पशुचिकित्सा प्रभारी डॉ. पी.सी. यादव ने बताया कि अश्ववंशीय पशुओं में ग्लेंडर्स नामक रोग होता है। जिसके बरखेलडेरिया मेलीआई जीवाणु से अश्व वंशीय पशुओं में होने वाले जीवाणुओं का संक्रमण मनुष्यों में भी फैल जाता है।

-मंगलवार को लिया ब्लड सैंपल...हिसार से आई रिपोर्ट

इससे बचाव के लिये समय पर अश्वमंशी पशुओं के रक्त के नमूने लेकर जांच कराई जाती है। शहजादपुर गांव में लालाराम मेघवाल के अश्व का जांच के लिये 26 नवंबर को नमूना लिया गया था। जिसे एनआरसीई केंद्र हिसार भेजा गया था।

-जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही सकते में प्रशासन

जांच में रिपोर्ट पॉजेटिव पाये जाने की सूचना पाते ही जिला प्रशासन सकते में आ गया। अश्व का यूथेलाईज किया जाना आवश्यक समझते हुए शुक्रवार को अश्व को वैज्ञानिक विधि से दर्द रहित मौत दिए जाने के लिए अश्वमालिक को राजी किया गया। अश्व शव नमक के साथ अन्य पाउडर डालकर दफनाया गया।

-राजस्थान में घोड़े व घोड़े की नस्लें

राजस्थान में सर्वाधिक घोड़े बीकानेर, जबकि सबसे कम घोड़े डूंगरपुर जिले में पाए जाते हैं। राजस्थान में मालाणी घोड़ा सर्वाधिक जोधपुर, बीकानेर तथा बाड़मेर जिलों में पाया जाता है। मालाणी घोड़ा राजस्थान में सबसे मजबूत नस्ल का घोड़ा माना जाता है। महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा भी मालाणी नस्ल का घोड़ा था। राजस्थान में काठियावाड़ी घोड़ा जालोर, सिहोही तथा डूंगरपुर जिलों में पाया जाता है। काठियावाड़ी घोड़े का रंग बिल्कुल सफेद होता है। इसे सबसे सुंदर घोड़ा माना जाता है। राज्य में मारवाड़ी घोड़ा जोधपुर में पाया जाता है। बाड़मेर में स्थित आलमजी के धोरे को घोड़ो का तीर्थ स्थल के नाम से जाना जाता है। अजमेर के तारागढ़ में स्थित पिर सैय्यद खिगसवार की मजार को घोड़ों की मजार कहते है।

sanjay kaushik Incharge
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