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Alwar: वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए लिया निर्णय

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक जनवरी 2023 से कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली एनसीआर में घरेलू, औधोगिक और कार्यों में कोयले के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। सीएक्यूएम ने आदेश में कहा है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी की सप्लाई हो रही है, वहां 1 अक्टूबर से कोयले पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। जहां पीएनजी की उपलब्धता नहीं है, उन क्षेत्रों में 1 जनवरी 2023 से यह आदेश लागू होंगे।

जयपुर

Published: June 13, 2022 06:14:21 pm

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक जनवरी 2023 से कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली एनसीआर में घरेलू, औधोगिक और कार्यों में कोयले के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। सीएक्यूएम ने आदेश में कहा है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी की सप्लाई हो रही है, वहां 1 अक्टूबर से कोयले पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। जहां पीएनजी की उपलब्धता नहीं है, उन क्षेत्रों में 1 जनवरी 2023 से यह आदेश लागू होंगे।
Pollution surrounded the power plant, dust control was not installed
Pollution surrounded the power plant, dust control was not installed
इस तरह पूरे एनसीआर में अगले वर्ष से कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। हालांकि थर्मल पावर प्लांटों में कम सल्फर वाले कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से छूट दी गई है। इन आदेशों से एनसीआर में शामिल राजस्थान के अलवर और भिवाड़ी भी प्रभावित होंगे। सीएक्यूएम ने अपने आदेशों में कहा है कि औधोगिक क्षेत्रों में लघु उद्योंगों में कोयले का उपयोग वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है।
7 औधोगिक जिलों में कोयले की खपत अधिक
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने कहा कि एनसीआर में शामिल 6 औधोगिक जिलों में कोयले की अधिक खपत है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एनसीआर में औधोगिक इकाइयों में सालाना 17 लाख टन कोयले का उपयोग किया जाता है, जिनमें गुरुग्राम, अलवर, भिवाड़ी, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत और गाजियाबाद जिलों में 14 लाख टन कोयले की खपत होती है। इनमें भी कोयले का अधिकतर उपयोग लघु उद्योगों में हो रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के पैनल ने पूर्व में वायु गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए आमजन और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे थे। पैनल को अधिकतर सुझाव कोयले के प्रतिबंध को लेकर मिले थे।

अलवर और भिवाड़ी में ईंधन के उपयोग पर नजर
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक अलवर में प्रतिवर्ष 1.4 लाख टन और भिवाड़ी में 2.7 लाख टन कोयले का उपयोग होता है। वहीं अलवर में प्रतिवर्ष 4.3 लाख टन एग्रो फ्यूल का इस्तेमाल होता है।रिपोर्ट के मुताबिक अलवर और भिवाड़ी में पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन पीएनजी में शिफ्ट नहीं होने के पीछे अधिक लागत एक बड़ा कारण है।

भिवाड़ी में पीएनजी पर शिफ्ट कर रहे उद्योग

भिवाड़ी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन अध्यक्ष प्रवीण लांबा भिवाड़ी में 70 प्रतिशत उद्योग स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट हो चुके हैं, शेष की प्रक्रिया जारी है। 1 जनवरी से पहले उद्योग स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट हो जाएंगे। भिवाड़ी के उद्योग वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए कटीबद्ध हैं।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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