Lightning Strike In Jaipur: मौत के तांडव के बीच जान पर खेल कईयों को जिंदा निकाल लाए ये लड़ाके.... इनसे मिलिए....

कोई है वहां......। हमें सुन सकते हैं क्या.....। हम आपको बचाने आए हैं....। कोई है तो आवाज लगाएं....।

By: JAYANT SHARMA

Updated: 12 Jul 2021, 12:39 PM IST

जयपुर
कोई है वहां......। हमें सुन सकते हैं क्या.....। हम आपको बचाने आए हैं....। कोई है तो आवाज लगाएं....। ये आवाजें पूरी रात आमेर महल के उस पहाड़ी हिस्से पर गूंजती रहीं जहां पर वज्रपात हुआ। आसपास के करीब चार सौ मीटर के रेडियस में पूरी रात से आज सवेरे तक सर्च जारी रहा और दोपहर तक सर्च जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह से खंगाला जा रहा है। 45 युवाओं की टीम अलग अलग जगहों पर सर्च कर रही है।

चुनौती से कम नहीं था उपर चढ़ना, रस्सों की मदद से पहाड़ी के रास्ते चढ़े
सिविल डिफेंस की टीम के सदस्य महेन्द्र कुमार ने बताया कि डिप्टी कंट्रोलर जगदीश रावत को जैसे ही सूचना मिली कि आमेर में बड़ा हादसा हुआ है। पूरी टीम को रवाना करने की तैयारी कर ली। आसपास बात की तो पता चला कि जहां हादसा हुआ है वहां रास्ता बेहद संकरा है और वहां से उपर जाने में समय लग सकता है। ऐसे में सिविल डिफेंस की टीम के सदस्यों ने पहाड़ी रास्ते से जाने की तैयारी की। हांडीपुरा क्षेत्र से पहाड़ी रास्ते पर रस्सों की मदद से लटकते हुए कुछ ही देर में हादसा स्थल तक पहुंच गए। उसके बाद शुरु हुआ सर्च अभियान। ड्रेगन लाइटें, टाॅर्च और रस्सों की मदद से पूरी रात से टीम आसपास के क्षेत्र को सर्च कर रही हैं

किसी की टूटी चप्पल मिली, कहीं पर खाने का पाउच मिला
टीम के सदस्यों गिर्राज, युवराज और बहादुर चैधरी ने बताया कि जहां पर वज्रपात हुआ और चट्टानें टूटी वहां पर आसपास जंगली वनस्पति होने के कारण तलाश बेहद मुश्किल रही। सिमित संसाधनों के बीच लगातार आवाजेें लगाते रहे और लोगों से पूछते रहीं कि कहीं पर कोई है तो नहीं। आवाजें नहीं आई तो फिर निशानों की मदद से सर्च शुरु की। कहीं पर टूटी चप्पल मिली तो कहीं पर खाने का पाउच मिला। वहां पर सर्च की तो वहां पर घायल लोगों को बरामद किया और उनको अस्पताल पहुंचाया। टीम के सदस्यों ने बताया कि 27 लोगों में से 18 को सिविल डिफेंस की टीम ने नीचे उतारा।

स्थानीय लोगों ने की टीम की पूरी मदद, कई लोगों को पहले ही उतार चुके थे
सिविल डिफेंस की टीम के सदस्य रोहिताश और निक्की ने बताया कि पूरी टीम जुटी थी और उनकी मदद को स्थानीय लोग भी देर रात तक लगे रहे। रात भर उपर से नीचे लोगों को लाने का काम जारी रहा। टीम के सदस्य युनुस ने बताया कि कई लोग तो ऐसे थे की चार से पांच बार उपर आ गए थे । जबकि उपर आने के लिए सैंकड़ों सीढि़या चढनी पडती है। लेकिन लोगों को बचाने का जज्बा ऐसा रहा कि लोग खुद को रोक नहीं सके।

JAYANT SHARMA Desk
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