Locust Attack|| और अब अंडे से मंडरा रहा खतरा

Rakhi Hajela

Updated: 16 Jan 2020, 03:12:12 PM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

प्रदेश में टिड्डियों का खतरा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब तक किसानों की नींद टिड्डी दल ने उड़ा रखी थी लेकिन अब उन पर इससे भी भयंकर खतरा मंडरा रहा है और वह खतरा है टिड्डियों के अंडे। अगर इन अंडों से टिड्डी निकलनी शुरू हो गई तो हालात और खराब हो जाएंगे क्योंकि एक टिड्डी एक बार में सौ से अधिक अंडे देती है।

टिड्‌डी विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को टिड्डियों पर नजर रखनी चाहिए कि उनका रंग कैसा है। यदि टिड्‌डी हल्के गुलाबी रंग की है तो अंडे देने का कोई खतरा नहीं है। वहीं टिड्‌डी यदि पीले रंग की है तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह या तो अंडे दे चुकी है या फिर देने की तैयारी में है। ऐसे में किसानों को उनके अंडे देने वाले स्थान की तलाश कर उसमें से बच्चे निकलते ही उनका खात्मा करने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंडे देते समय टिड्‌डी बहुत सुस्त होती है और एक ही स्थान पर बैठी रहती है। ऐसे में उन्हें मारना बहुत सुविधाजनक रहेगा।

टिड्डियों का जीवन चक्र
आपको बता दें कि टिड्डियों का जीवन सामान्यतया तीन से छह माह का माना जाता है। जीवन के अनुकूल परिस्थितियां व भोजन मिलने पर ये छह माह तक जीवित रह सकती है। नमी वाले क्षेत्र में टिड्डियां अंडे देती हैं। टिड्‌डी एक बार में बीस से दो सौ तक अंडे देती है। मादा टिड्‌डी जमीन में छेद कर अपने अंडों को सहेजती है। गरम जलवायु में दस से बीस दिन में अंडे फूट जाते हैं। वहीं सर्दियों में ये अंडे प्रसुप्त रहते हैं। शिशु टिड्डी के पंख नहीं होते तथा अन्य बातों में यह वयस्क टिड्डी के समान होती है। शिशु टिड्डी का भोजन वनस्पति है और ये पांच छह सप्ताह में वयस्क हो जाती है। इस अवधि में चार से छह बार तक इसकी त्वचा बदलती है। वयस्क टिड्डियों में 10 से लेकर 30 दिनों तक में प्रौढ़ता आ जाती है और तब वे फिर अंडे देती हैं। टिड्डी का विकास आद्र्रता ओर ताप पर अत्याधिक निर्भर करता है। टिड्‌डी को मारने का सबसे बेहतरीन उपाय यहीं है कि अंडों के फूटते ही उन पर रसायन का छिड़काव कर दिया जाए,ताकि बच्चे वहीं पर नष्ट हो सके।

प्रशिक्षित फौज की तरह हमला करता है टिड्डी दल

टिड्डी दल बिल्कुल अलग तरह के जीव होते हैं। ये झुंड में किसी प्रशिक्षित फौज की तरह हमलावर होते हैं और लहलहाते खेतों को तबाह कर आगे बढ़ जाते हैं। टिड्डी दल की फौज जिस खेत पर हमला करने का इरादा करती है, उस पर एक सिरे से अचानक दाखिल होती है और दूसरे सिरे पर पहुंचने तक खेत उजाड़ देती है। टिड्डी दल उस वक्त तक तबाही फैलाता रहता है जब तक उस खेत में तमाम फसल बर्बाद ना हो जाए। जब उसे पूरी तरह विश्वास हो जाता है कि अब उस खेत में उसकी दिलचस्पी के लिए कुछ बाकी नहीं बचा हो, तो फिर ये अगले खेत का रुख कर उसे भी अपना शिकार बना डालता है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े मकोड़ों में टिड्डी दल सबसे निर्दयी और खौफनाक किस्म का होता है।

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