अब कोई भी जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है जमीन, लेकिन यहां कब मिलेगी 'अपनी' जमीन

अब कोई भी व्यक्ति जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है लेकिन अभी देश में कई ऐसे राज्य हैं जहां कोई जमीन नहीं खरीद सकता और खरीद सकता है तो शर्तें लागू हैं।

By: Anand

Published: 28 Oct 2020, 12:32 PM IST

आनंद मणि त्रिपाठी
नई दिल्ली। 5 अगस्त को 2019 को 72 साल बाद जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किया तो दिमाग की नसों से लेकर सोशल मीडिया के तारों पर खुशी की यही लहर तैरती दिखाई पड़ी कि असल में अब जमीन मिली गई। फिर चाहे बात राजनीति की हो, कूटनीति की हो, जुड़ाव की हो या फिर सांस्कृतिक समन्वय की।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक संपूर्ण भारत एकात्म भाव प्रकट करता हुआ दिखाई दिया। अब गृह मंत्रालय ने भी मंगलवार को आदेश जारी किया है। इसके तहत अब कोई भी व्यक्ति जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है लेकिन अभी देश में कई ऐसे राज्य हैं जहां कोई जमीन नहीं खरीद सकता और खरीद सकता है तो शर्तें लागू हैं। पूर्वोत्तर में तो एक राज्य में रहने वाला दूसरे राज्य में जमीन नहीं खरीद सकता है।

हिमाचल प्रदेश
जम्मू-कश्मीर से सटा हुए इस राज्य में कोई भी बाहरी व्यक्ति खेती करने के लिए जमीन नहीं खरीद सकता है। यहां तक कि हिमाचल का वह निवासी भी जो किसान नहीं है। साल 1972 में भूमि मुजारा कानून की धारा 118 के तहत ज़मीन खरीदने पर रोक लगाई गई थी। कुछ मामलों में गैर-किसान आवासीय सुविधा के लिए जमीन खरीद सकते है। इसके लिए कई औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सरकार से अनुमति लेनी होती है।

उत्तराखंड
हिमाचल प्रदेश से ही सीमा साझा करने वाले उत्तराखंड में भी बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर रोक है। उत्तराखंड जमींदारी उन्मूलन अधिनियम की धारा 154 के अनुसार, 12 सितंबर 2003 तक जिन लोगों के पास राज्य में जमीने हैं, वो 12.5 एकड़ तक जमीन खरीद सकते है लेकिन जिनके पास जमीन नहीं है वो इस तारीख के बाद सिर्फ 250 वर्गमीटर से ज्यादा जमीन नहीं खरीद सकते हैं।

नागालैंड
नागालैंड में अनुच्छेद 371 A लागू है। इसके मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो कि नागालैंड का स्थाई निवासी नहीं है वह राज्य में ज़मीन नहीं खरीद सकता है। नागालैंड के आदिवासियों की जमीनें सुरक्षित रहे इसके लिए ही प्रावधान लागू है। नागालैंड में जाने के लिए दूसरे राज्यों के लोगों को परमिट लेना भी ज़रूरी है वरना राज्य में प्रवेश नहीं मिलेगा।

असम
कमाख्या मंदिर, काजीरंगा अभ्यारण्य और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे असम के आदिवासी क्षेत्र में बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की मनाही है। अनुच्छेद 371 B के तहत इस राज्य को विशेष शक्तियां दी गई हैं। इसके साथ ही देश के राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर राज्य के राज्यपाल को अपनी शक्तियां हस्तांतरित कर सकते हैं।

मणिपुर
लोकताक झील में विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान के लिए प्रसिद्ध मणिपुर को में भी कोई जमीन नहीं खरीद सकता है। संविधान में अनुच्छेद 371 C के तहत मणिपुर को विशेष शक्तियां हासिल हैं। यहां पर स्थानीय लोगों को छोड़कर अन्य राज्यों के नागरिक जमीन नहीं खरीद सकते।

सिक्किम
सिक्किम में लागू अनुच्छेद 371 F के अनुसार राज्य सरकार के पास सभी जमीनों का मालिकाना अधिकार है। भारत में विलय से पहले अगर किसी के पास उसकी निजी जमीन थी तो उस पर अब राज्य सरकार का अधिकार है। किसी को इस राज्य के जनजातीय इलाके में ज़मीन खरीदनी होगी, तो वहां के केवल आदिवासी लोग ही ज़मीन खरीद सकते हैं।

मिजोरम
मिजोरम में अनुच्छेद 371 G लागू है। इसके अनुसार ही मिजोरम के धार्मिक और सामाजिक मामले, प्रशासनिक और आपराधिक मामले, साथ ही साथ ज़मीनी मामले में संसद का कानून लागू नहीं होता। इसके लिए राज्य का अपना मिजो कस्टमरी लॉ है। इसके मुताबिक फैसले होते हैं। संसद का कानून भी यहां तभी लागू होगा जब यहां की विधानसभा इस पर फैसला ले। उद्योग धंधों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 2016 में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास बिल पास किया गया था। इसके बाद प्राइवेट कंपनियां वहां की सरकार से ज़मीन खरीद सकती हैं।

अरुणाचल प्रदेश
देश में सबसे पहले सूरज की किरण इसी प्रदेश की सरजंमी को चूमती हैं लेकिन आप भी यहां आकर इस सरजंमी को चूम सकते हैं लेकिन यहां आप जमीन नहीं खरीद सकते हैं। स्थानीय निवासियों को ही यहां जमीन का मालिकाता हक दिया गया है। अन्य राज्य के लोग यहां जमीन नहीं खरीद सकते हैं। अनुच्छेद 371 H के तहत राज्य की कानून और व्यवस्था की स्थिति पर राज्यपाल को विशेष अधिकार मिला हुआ है।

गोवा
समुद्र के किनारे बसे गोवा में किसका मन बस जाने का नहीं होता है लेकिन यहां जमीन खरीद लेना आसान नहीं है। अनुच्छेद 371 I के तहत, गोवा के पास जमीन की बिक्री और संपत्ति के स्वामित्व पर कानून बनाने के अधिकार हैं। यही वजह है कि गोवा आज भी वैसे ही मनमोहक बना हुआ है,जैसे था।

तमिलनाडू
तमिलनाडू में 59.95 एकड़ से ज्यादा कृषि जमीन नहीं खरीदी जा सकती है। फिर भी किसी को यहां अगर जमीन खरीदनी है तो पहले यह साबित करना पड़ेगा कि उस जमीन पर पिछले दस साल से कोई भी खेती नहीं हो रही है।

कर्नाटक
कर्नाटक में सिर्फ किसान ही खेती की जमीन खरीद सकता है हालांकि कोई भी व्यक्ति ‘कर्नाटक लैंड रेवेन्यू एक्ट’ 1964 के मुताबिक, इंडस्ट्रियल ऑर्गेनाइजेशन जमीन खरीद सकते हैं लेकिन पहले आपको राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। कर्नाटक में सालाना 25 लाख से ज्यादा की आमदनी वाले को किसान नहीं माना जाता है।

...यहां राज्यपाल होता है सर्वेसर्वा
देश में कई ऐसे राज्य और क्षेत्र हैं जहां दूसरे राज्य के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है। इन्हें संविधान की पांचवी व छठी अनुसूची में उल्लेखित किया गया है। पांचवी अनुसूची में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के आदिवासी बहुल इलाक़े आते हैं। छठी सूची में असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा आते हैं। यहां राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण है। यहां किसी स्थानीय जनजाति या आदिवासी की जमीन खरीदी नहीं जा सकती है।

Anand Reporting
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