पद्मश्री सैयद शाकिर अली ने कोरोना काल में ग्रामीणों की मनोदशा को दर्शाया

कोरोना महामारी ने जहां शहर की आबो—हवा को पूरी तरह बदल कर रख दिया है, वहीं इन दिनों इसका असर ग्रामीण जन—जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों में भय व्याप्त हो रहा है। इसी कड़ी में जयपुर के मशहूर मिनिएचर कलाकार पद्मश्री सैयद शाकिर अली ने ग्रामीणों की मनोदशा को अपनी पेंटिंग्स में दर्शाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उन्होंने एक पेंटिंग में ग्रामीण इलाकों के लोगों के दु:ख, दर्द को जाहिर किया है। जिसमें उनकी घबराहट को देखा जा सकता है।

By: imran sheikh

Published: 01 Jul 2020, 12:03 AM IST

ग्रामीण जन—जीवन की स्थिति व भय को बनाया अपनी कला का आधार

कोरोना महामारी ने जहां शहर की आबो—हवा को पूरी तरह बदल कर रख दिया है, वहीं इन दिनों इसका असर ग्रामीण जन—जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों में भय व्याप्त हो रहा है। इसी कड़ी में जयपुर के मशहूर मिनिएचर कलाकार पद्मश्री सैयद शाकिर अली ने ग्रामीणों की मनोदशा को अपनी पेंटिंग्स में दर्शाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उन्होंने एक पेंटिंग में ग्रामीण इलाकों के लोगों के दु:ख, दर्द को जाहिर किया है। जिसमें उनकी घबराहट को देखा जा सकता है।

रंगों से दर्शाया परिवार का पलायन
आठ बाई छह की पेंटिंग में वरिष्ठ कलाकार पद्मश्री सैयद शाकिर अली ने एक ग्रामीण परिवार के पलायन को दिखाया है। जिसमें परिवार के लोगों ने मुंह पर मॉस्क लगा रखा है और उनके चेहरे पर चिंता की लकीरों को उकेरा है। उन्होंने बताया कि इसमें एक कुत्ता भी है, जो इस परिवार को पलायन करने से रोक रहा है। मिनिएचर शैली में बनाई गई इस पेंटिंग को उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान बनाया है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी विदेशों के बाद शहरों में पहुंची और अब गांवों की ओर बढ़ रही है। उनका कहना था कि कोरोना महामारी के चलते मिनिएचर कला के व्यवसाय पर गहरा असर पड़ा है। ऐसे में सरकार को कलाकारों के लिए योजनाएं बनाना चाहिए और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना चाहिए।

बचपन में कोयले से चित्रकारी करते थे सैयद शाकिर अली
बचपन से ही पेंटिंग की तरफ रुझान रखने वाले सैयद शाकिर अली मोहल्ले की दीवारों पर कोयले से चित्रकारी करते थे। एक दिन एक नई-नवेली साफ दीवार पर उन्हें चित्रकारी करते देख उस मकान के मालिक उन्हें डाटते हुए पिताजी के पास ले गए। उसके बाद पिताजी के पास जाकर उस मकान मालिक ने उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए गुरु के पास ले भेजने को कहा। हालांकि उनके पिता उन्हें डाक्टर बनाना चाहते थे, इसलिए उन्हाेंने जीव विज्ञान विषय लिया। लेकिन कला के प्रति उनके रुझान काे देखते हुए उनके पिताजी ने कला गुरु रामगोपाल विजयवर्गीय के पास छोड दिया, जहां पर उन्होंने विधिवत चित्रकारी का ज्ञान हासिल किया।

सैयद शाकिर अली मिनिएचर की मुगल शैली के कलाकार हैं। हर चित्र के रूपाकार काे डिटेल से उकेरना उनकी फितरत है फिर चाहे वाे किरदार की आंख ही क्याें न हाे। आंख के एक-एक रेशे और रेटीना काे भी वाे करीने से उभारते हैं, इसमें चाहे कितना भी समय क्याें न लग जाए। वें कला काे प्रासंगिक बनाने के लिए नित नए परिवर्तन करते रहते है। 2013 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

imran sheikh Desk
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