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असर की सर्वे रिपोर्ट : घर में स्मार्ट फोन होने के बाद भी बच्चों के पास नहीं फोन

राजस्थान में स्मार्ट फोन होने के बाद भी बच्चों के पास उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि सभी बच्चों में से एक तिहाई से अधिक बच्चों के पास घर पर स्मार्टफोन 66.6 फीसदी हैं, इनमें से लगभग एक तिहाई से अधिक बच्चे ऐसे हैं जिनके लिए यह स्मार्टफोन उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

जयपुर

Published: November 17, 2021 10:12:54 pm


राजस्थान में 6 से 14 साल के बच्चों का नामांकन बढ़ा, 59.1 से 68.4 फीसदी हुआ नामांकन
जयपुर।
राजस्थान में स्मार्ट फोन होने के बाद भी बच्चों के पास उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि सभी बच्चों में से एक तिहाई से अधिक बच्चों के पास घर पर स्मार्टफोन 66.6 फीसदी हैं, इनमें से लगभग एक तिहाई से अधिक बच्चे ऐसे हैं जिनके लिए यह स्मार्टफोन उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं हैं। छोटी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों की अपेक्षा बड़ी कक्षा में पढऩे वाले ज्यादा बच्चों के पास स्मार्टफोन उपयोग के लिए उपलब्ध हैं। यही स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रही हैं। यह खुलासा हुआ है बुधवार को प्रथम संस्थान की ओर से जारी की गई असर की सर्वे रिपोर्ट में। प्रथम संस्थान की ओर से बुधवार को असर की 16वीं सर्वे रिपोर्ट जारी कर दी गई। प्रथम के ट्रस्टी कुलभूषण कोठारी ने बताया कि इस बार कोविड के कारण और मार्च 2020 से स्कूल बंद होने के कारण असर ने फोन आधारित सर्वे किया और यह जानने की कोशिश की कि बच्चे इस समय कैसे पढ़ रहे हैं।
स्मार्टफोन की उपलब्धि:
राष्ट्रीयस्तर पर 2018 की तुलना में लगभग दुगने घरों में स्मार्टफोन उपलब्ध है। 2018 में 36.5 फीसदी से बढ़कर 2021 में 67.6 फीसदी हो गई है लेकिन सरकारी स्कूल जाने वाले बच्चों की अपेक्षा 63.7 फीसदी निजी स्कूल के बच्चों के पास मार्टफोन हैं। वहीं राजस्थान में 2018 में 39.7 फीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन थे जो 2021 में 66.6 फीसदी तक हो गई है।
2021 में ऐसे 80 फीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन उपलब्ध है जिनके पैरेंट्स नवीं कक्षा से अधिक पढ़े लिखे हैं। इसकी तुलना में केवल 50 फीसदी बच्चो के पास स्मार्टफोन उपलब्ध हैं जिनके पैरेंट्स पांचवीं पास के कम पढ़े लिखे हैं। इसके बाद भी जिन बच्चों के पैरेंट्स कम पढ़े लिखे हैं उनमें से भी लगभग एक चौथाई से अधिक बच्चों की पढ़ाई के लिए मार्च 2020 के बाद एक नया स्मार्टफोन खरीदा गया।
असर की सर्वे रिपोर्ट : घर में स्मार्ट फोन होने के बाद भी बच्चों के पास नहीं फोन
असर की सर्वे रिपोर्ट : घर में स्मार्ट फोन होने के बाद भी बच्चों के पास नहीं फोन
ट्यूशन: सर्वे के मुताबिक राजस्थान में ट्यूशन लेने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। 2018 में इन बच्चों का आकड़ा 5.1 फीसदी था जो 2021 में बढ़कर 15.3 फीसदी हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर 2018 में 30 फीसदी से कम बच्चे ट्यूशन लेते थे, 2021 में यह अनुपात बढ़ कर 40 फीसदी हुआ। केरल को छोड़कर सभी राज्यों में ट्यूशन लेने वाले बच्चों की संख्या
जिन बच्चों के स्कूल खुले वह कम ले रहे ट्यूशन।

राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों का नामांकन निजी से सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ रहा है। 6 से14 आयु वर्ग के बच्चों का निजी स्कूलों में नामांकन 2018 में 32.5फीसदी से घटकर, 2021 में 24.4 फीसदी हुआ। राजस्थान में 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों का सरकारी विद्यालयों में नामांकन 2018 में 59.1 फीसदी था जो 2021 में बढ़कर 68.4 फीसदी हुआ है। राजस्थान में 6 से 14 आयु वर्ग के अनामांकित बच्चों का अनुपात 3.4 फीसदी था जो 2021 में यह अनुपात 4.5 फीसदी पर आ गया। राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल में बड़ी उम्र के बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 15 से16 आयु वर्ग के बच्चों का सरकारी स्कूल में नामांकन का आंकड़ा 2018 में 57.4 फीसदी था जो 2021 में 67.4 फीसदी हो गया।
प्रथम राजस्थान के ट्रस्टी कुलभूषण कोठारी ने बताया कि सर्वे देशभर के 25 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों के 5 से 16 आयु वर्ग के बच्चों की पढ़ाई को लेकर किया गया। कुल कुल 76 हजार 706 घरों और 75 हजार 234 बच्चों पर यह सर्वे किया गया है। सर्वे में 7299 प्राथमिक कक्षाओं के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रिंसिपल को शामिल किया गया। राजस्थान के 33जिलों के कुल 4961 घरों और 5380 बच्चे सर्वे में शामिल हुए।

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