गहलोत ने याद दिलाया पीएम का वादा, तीन कामों में मांगा सहयोग

नीति आयोग की बैठक, ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने, जल जीवन मिशन में खर्च का अनुपात बदलने, पोटाश खनन में सहयोग करने का आग्रह

By: pushpendra shekhawat

Updated: 20 Feb 2021, 07:55 PM IST

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को हुई नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का वादा याद दिलाया। गहलोत ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को जल्द से जल्द राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करने का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में मात्र 1 प्रतिशत पेयजल है और मरुस्थलीय क्षेत्र में भी चुनौतियां ज्यादा हैं। केन्द्र सरकार उत्तर पूर्वी एवं पहाड़ी राज्यों की तरह प्रदेश को भी जल जीवन मिशन में 90:10 के तहत सहायता उपलब्ध कराए। वही, दुर्लभ खनिज पोटाश के राजस्थान में अथाह भण्डार मौजूद हैं। उन्होंने खनिज दोहन में केन्द्र सरकार से आवश्यक सहयोग प्रदान करने को कहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस छठी बैठक में गहलोत ने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का अनुमानित खर्च करीब 40 हजार करोड़ रुपए है, जो राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाना संभव नहीं है। उन्होंने मोदी से कहा कि 7 जुलाई, 2018 को जयपुर और 6 अक्टूबर, 2018 को अजमेर में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करने का वादा किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 13 जिलों (झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, करौली, अलवर, भरतपुर, दौसा एवं धौलपुर) को पेयजल एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की इस परियोजना को जल्द राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा दिया जाए।

रोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल हो

गहलोत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के गंभीर संकट के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ ही रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। केन्द्र सरकार इस दिशा में भी सकारात्मक पहल कर राज्यों को राहत प्रदान करे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण के माध्यम से यहां पोटाश खनिज के दोहन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। ऐसे में केंद्र को सहयोग करना चाहिए। वहीं, राजस्थान में सतही एवं भू-जल की अत्यधिक कमी को देखते हुए जन जीवन मिशन के तहत खर्चे का अनुपात बदला जाए। गांव-ढाणियों के बीच दूरी अधिक होने के साथ ही विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां घर-घर पेयजल उपलब्ध करवाने में लागत अन्य राज्यों के मुकाबले काफी ज्यादा आती है।

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