कल से शुरू होगा अष्टानिका महापर्व, पहले दिन निकलेगी घटयात्रा

ashtahnika 2020: अष्टानिका पर्व का जैन समाज में विशेष महत्व हैं। आठ दिन का यह पर्व, वर्ष में तीन बार मनाया जाता है। आषाड़ (जून-जुलाई ), कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर ), एवं फाल्गुन माह ( फरवरी-मार्च ) में इस पर्व को मनाया जाता है। भगवान महावीर को समर्पित यह पर्व जैन धर्म के सबसे पुराने त्यौहारों में से एक है। यह शाश्वत पर्व सोमवार 2 मार्च से शुरू हो रहा है। आठ दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन 9 मार्च को होगा।

By: Devendra Singh

Updated: 01 Mar 2020, 01:53 PM IST

जयपुर। अष्टानिका पर्व का जैन समाज में विशेष महत्व हैं। आठ दिन का यह पर्व, वर्ष में तीन बार मनाया जाता है। आषाड़ (जून- जुलाई ), कार्तिक (अक्टूबर – नवम्बर ), एवं फाल्गुन माह ( फरवरी – मार्च ) में इस पर्व को मनाया जाता है। भगवान महावीर को समर्पित यह पर्व जैन धर्म के सबसे पुराने त्यौहारों में से एक है। यह शाश्वत पर्व सोमवार 2 मार्च से शुरू हो रहा है। आठ दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन 9 मार्च को होगा। इस दौरान प्रतिदिन विशेष पूजा अर्चना, मंडल विधान एवं को शाम को आरती, भक्ति संध्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। शहर के गोपालजी का रास्ता स्थित काला डेरा दिगम्बर जैन मंदिर सहित कई मंदिरों में अष्टानिका महापर्व मनाया जाएगा। जैन धर्म के इस बड़े पर्व के दौरान आठ दिनो तक जैन मंदिरों में सिद्धचक्र विधान मंडल पूजा का आयोजन होगा। सोमवार को ध्वजारोहण, चित्र अनावरण व दीप प्रज्जवलन से पर्व का शुभारंभ होगा। महापर्व के समापन पर 9 मार्च को विश्व शांति महायज्ञ होगा। इसके बाद गाजे बाजे के साथ श्रीजी की रथयात्रा निकाली जाएगी। अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन परिषद के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन ने बताया कि साल में तीन बार कार्तिक, फाल्गुन व आषाढ़ माह में मनाए जाने वाले इस पर्व की शुरुआत मैना सुन्दरी द्वारा अपने पति श्रीपाल के कुष्ठ रोग निवारण के लिए की थी। मैना सुंदरी ने आठ दिनो तक सिद्धचक्र विधान मंडल की पूजा कर तथा तीर्थंकरों के अभिषेक जल (गंधोदक) के छीटों से श्रीपाल को कुष्ठ रोग से मुक्त करवाया था।

चंद्रप्रभ का मोक्ष कल्याणक

जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ का मोक्ष कल्याणक सोमवार को भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर जैन मंदिरों में विशेष अष्टदृव्यों से पूजा, अभिषेक, पूजा-अर्चना होगी। देश में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ शांतिधारा की जाएगी। मोक्ष कल्याणक के अघ्र्य चढ़ाने के बाद तीर्थंकर भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।

Devendra Singh Reporting
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