नौ महीने की बच्ची बिलखती रही, मगर नहीं पसीजा जिम्मेदारों का दिल

विधायक सुरेश सिंह रावत की गोद में विधानसभा आई बच्ची
परिजनों ने सुनाई व्यथा, रावत ने विधानसभा में उठाया मामला
फाइनेंस कंपनी वालों ने बच्ची को बाहर निकाले बिना सील किया मकान

जयपुर।

नौ महीने की मासूम बच्ची...जिसकी आंखों से आंसू टपके तो हर किसी की आंख नम हो जाएग। मगर एक मकान में कैद ये बच्ची रोती रही बिलखती रही, मगर जिम्मेदारों के दिल नहीं पसीजे। घंटों एक मकान में कैद इस बच्ची के परिजन मकान के बाहर बिलखते रहे। यह मामला है पुष्कर क्षेत्र के रूपनगढ़ इलाके का। मामला इतना गंभीर था कि विधानसभा में भी इसकी गूंज सुनाई दी।

पुष्कर से विधायक सुरेश सिंह रावत अपनी गोद में एक नौ महीने की बच्ची को लेकर विधानसभा पहुंचे। सभी के मन में एक ही सवाल था कि आखिरी रावत की गोद में यह बच्ची कौन है, जब इस बच्ची की दास्तां विधायक ने सुनाई तो सभी की आंखें नम हो गई। महज नौ महीने की इस मासूम को एक मकान में अकेले रहना पड़ा।

शून्यकाल के दौरान रावत ने मामला उठाया और बताया कि फाइनेंस कंपनी ने मकान सील कर दिया और यह भी नहीं देखा कि अंदर 9 माह की बच्ची सो रही है। परिजनों ने बोला भी, मगर कंपनी के लोगों ने उनकी एक नहीं सुनी। मामले को लेकर विधानसभा में स्पीकर सीपी जोशी ने भी कहा कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।

पुलिस और प्रशासन भी मूक बन गया

रावत ने बताया कि जब फाइनेंस कंपनी ने वालों ने नहीं सुनी तो थक-हारकर बच्ची के परिजनों ने एसडीएम और लोकल पुलिस की शरण ली। वहां भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। उधर मकान में कैद बच्ची का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका था।

अजमेर जाकर लगाई गुहार, तब बाहर आई मासमू

सभी जगहों से कोई उम्मीद नहीं लगी तो परिजन अजमेर गए और कलेक्टर को सारी घटना बताई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर बच्ची को मकान से बाहर निकाला गया। बच्ची के दादा ओम प्रकाश ने बताया कि कोर्ट से स्टे होने के बावजूद अवैध तरीके से फाइनेंस ने कंपनी ने मकान को सीज कर दिया। उन्होंने स्थानीय पुलिस, प्रशासन से भी गुहार लगाई, मगर किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद अजमेर जाकर कलेक्टर से मिले और उनके निर्देश पर बच्ची को बाहर निकाला गया।

Umesh Sharma Reporting
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