ये रामलला की महिमा है कि मंदिर निर्माण शुरू होते ही आंदोलनकारी बरी हो गए—पूनियां

28 साल बाद बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट ने प्रबल साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। कोर्ट के इस फैसले को लेकर मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों में खुशी की लहर है। वहीं भाजपा ने भी कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।

By: Umesh Sharma

Published: 30 Sep 2020, 04:55 PM IST

जयपुर।

28 साल बाद बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट ने प्रबल साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। कोर्ट के इस फैसले को लेकर मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों में खुशी की लहर है। वहीं भाजपा ने भी कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने इसे सत्य, धर्म और आस्था की जती बताया है। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए पूनियां ने कहा कि आस्था का सैलाब था और अचानक घटना घटित होना अपराध साबित नहीं करता। आज 28 साल बाद न्याय की फिर जीत हुई है, जब श्री राम जन्म भूमि के आंदोलन से जुड़े राजनेता व धार्मिक और सामाजिक संगठनों के नेता को न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। पूनियां ने कहा कि ये रामजी की ही महिमा है कि एक तरफ रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है और दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े नेता कोर्ट से बरी हो गए हैं।

आपको बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, वरिष्ठ नेता उमा भारती, विनय कटियार सहित सभी 32 आरोपियों को मामले में बरी किया गया है। सभी को कोर्ट ने तलब किया था, लेकिन कुछ नेता कोर्ट में पेश नहीं हो सके।

Umesh Sharma Reporting
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