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राजस्थान विधानसभा चुनाव: ये हैं भाजपा के 22 बागी, जो मोदी और शाह के निशाने पर

locationजयपुरPublished: Nov 14, 2023 01:45:37 pm

Submitted by:

Bhavnesh Gupta

विधानसभा चुनाव में बागियों ने भाजपा की नींद उड़ा रखी है, लेकिन अब पार्टी के एक फैसले से बागियों की नींद उड़ने वाली है।

ये हैं भाजपा के 22 बागी, जो मोदी और शाह आंखों के निशाने पर
भवनेश गुप्ता
जयपुर। विधानसभा चुनाव में बागियों ने भाजपा की नींद उड़ा रखी है, लेकिन अब पार्टी के एक फैसले से बागियों की नींद उड़ने वाली है। पार्टी ने मन बना लिया है कि मान-मनौव्वल के बाद भी जिन नेताओं ने नामांकन वापस नहीं लिया और जो अब भी पार्टी के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं, उन्हें पार्टी में अब कभी 'एंट्री' नहीं मिलेगी। भाजपा के चुनाव प्रभारी प्रल्हाद जोशी ने स्पष्ट रूप से इसके संकेत दे दिए हैं।
दरअसल, नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी भाजपा ने बागियों को वापस पार्टी में लौटने के लिए एक दिन का समय दिया था। लेकिन कई नेता वापस नहीं आए और अब भी बागी होकर भाजपा प्रत्याशियों को पाला दे रहे हैं। इस मामले को लेकर प्रल्हाद जोशी की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी चर्चा हो चुकी है। इसकी सख्ती से पालना होती है तो बागी होकर चुनाव लड़ रहे नेताओं के लिए भाजपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।
आक्या, युनूस, मेघवाल और प्रियंका दे रहे हैं पाला, ऐसे 22 बड़े नेता
चित्तौड़गढ़ से भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी के सामने इस सीट से वर्तमान विधायक चंद्रभान आक्या ने ताल ठोक रखी है। पार्टी ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने और नामांकन वापस नहीं लिया। इसी तर डीडवाना सीट से युनूस खान भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। प्रियंका चौधरी बाड़मेर विधानसभा सीट और कैलाश मेघवाल शाहपुरा सीट से मैदान में है। इन सहित करीब 22 बड़े नेता चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।
मगर इस निर्णय सवाल उठा रहे हैं ?
भाजपा भले ही अपने बागियों को वापस लेने का मन बना रही हो, लेकिन दलबदलुओं के लिए पार्टी ने दरवाजे खोल रखे हैं। चाहे गिर्राज सिंह मलिंगा हो या फिर सुभाष मील। कई नेता ऐसे हैं, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें मैदान में भी उतार दिया।
आगे लोकसभा चुनाव, इसलिए भी संदेश
अगले छह माह बाद लोकसभा चुनाव होने हैं।पार्टी आशंकित है कि कुछ बागी हैं जो विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फिर पार्टी में शामिल होने की कोशिश करेंगे। इसलिए भी यह सख्त रुख अपनाया गया है।

ये भी हैं बागी
रविन्द्र भाटी, राजेन्द्र भादू, राजेन्द्र भाम्बू, राजेन्द्र नायक, ताराचंद धायल, आशा मीना, गुलाब सिंवर, जीवाराम चौधरी जसवीर सिंह खरवा, इन्दर सिंह, हिम्मत राजपुरोहित, प्रभुदयाल सारस्वत, भवानी सिंह राजावत, मुकेश गोयल, बंशीधर बाजिया, आशुसिंह सुरपुरा, मंगलराम कोली, सुखवंत सिंह
'हमने बागियों को वापिस आने का समय दिया था। ऐसे लोग चुनाव बाद पार्टी में शामिल होने की कोशिश करते हैं। इसी कारण अनुशासनहीनता बढ़ रही है। मेरी राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बात हुई है और इस आधार पर निर्णय किया है कि इन्हें पार्टी में शामिल नहीं करेंगे। कार्यकर्ताओं को संदेश दिया गया है।
-प्रल्हाद जोशी, चुनाव प्रभारी, भाजपा

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