अमर हो गई 'सुंदरी' की प्रेमकथा

अमर हो गई 'सुंदरी' की प्रेमकथा

Moti ram | Updated: 15 Feb 2015, 12:28:00 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

रणथम्भौर की 'सुंदरी' किसी समय 'स्टार मेल' से प्रेम करती थी, लेकिन उनके बीच 'जालिमÓ आ गया। जालिम भी सुंदरी को चाहने लगा। उसके इलाके में आने-जाने लगा। 

रणथम्भौर की 'सुंदरी' किसी समय 'स्टार मेल' से प्रेम करती थी, लेकिन उनके बीच 'जालिमÓ आ गया। जालिम भी सुंदरी को चाहने लगा। उसके इलाके में आने-जाने लगा। जालिम की दिलेरी को देखकर सुंदरी भी उसे चाहने लगी। धीरे-धीरे उनकी प्रगाढ़ता बढ़ती गई। 

सुंदरी की जालिम से बढ़ती नजदीकीयां स्टार मेल को अखरने लगी। उसका प्रेम प्रतिशोध व नफरत में बदल गया। एक दिन सुंदरी से उसका संघर्ष हुआ। तब से सुंदरी ने वह जगह छोड़ दिया, जहां वह रहती थी। इसके बाद आज तक उसका पता नहीं चला। 

यह किसी इंसान की प्रेम कहानी नहीं है और न ही यह फिल्मी पटकथा है। यह सच्ची कहानी है रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की बाघिन टी-17 तथा बाघ टी-28  व टी-25 की। ढाई साल से इन तीनों की गतिविधियों को कैमरे में कैद करने के बाद जाने-माने वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर नल्ला मुत्थु ने अब इसे फिल्म का रूप दिया है। 

इस फिल्म को उन्होंने 'टाइगर रिवेन्जÓ नाम दिया है। इस कार्य के दौरान ही बाघिन टी-17 लापता भी हो गई जो अब तक नजर नहीं आई। यह फिल्म तीन दिन पहले ही नेशनल ज्योग्राफिक चैनल पर प्रसारित हुई। वेलेंटाइन-डे के नजदीक प्रसारित इस फिल्म की चर्चा रणथम्भौर अभयारण्य में छाई हुई है।   

जालिम ने पाला 
वनाधिकारी बताते हैं कि बाघिन के लापता होने के बाद बाघ टी-25 ने सुंदरी के तीनों शावकों को पाला था। पहली बार ऐसा देखने को मिला कि मेल टाइगर शावकों के साथ दिखा। हर समय उनकी सुरक्षा में साथ रहा। इसे देख हर कोई सुंदरी से उसके प्रेम की कहानी को दोहराता था।  

ढाई साल में बनी  
नल्ला बताते हैं कि इस फिल्म के निर्माण में उन्हें ढाई साल लगे हैं। फिल्म एक घंटे की हैं। पूरी शूटिंग रणथम्भौर पार्क की ही है। फिल्म के निर्माण में नेचर गाइड हेमराज मीणा व चालक हेमराज ने भी सहयोग किया है। 

वे कहते हैं कि इस फिल्म के जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि लोग बाघों की भावनाओं को महसूस करें। उनकी समस्याओं को भी समझें। इसी से उनका संरक्षण हो सकता है। फिल्म में किसी से कोई आर्थिक सहयोग नहीं लिया है। बाघों संरक्षण के खातिर निर्माण किया है। 

पार्क में तीसरी फिल्म
नल्ला रणथम्भौर में तीन फिल्म बना चुके हैं। इससे पहले बनाई फिल्म टाइगर डायनेस्टी व टाइगर क्वीन हैं। टाइगर डायनेस्टी को राष्ट्रीय फिल्म फेयर अवार्ड में बेस्ट सिनेमेटोग्राफी से नवाजा जा चुका है। 

शावकों को छोड़ गई सुंदरी  
रणथम्भौर में बाघिन टी-17 को सुंदरी, बाघ टी-28 को स्टार मेल व बाघ टी-25 को जालिम के नाम से जाना जाता है। जब सुंदरी टी-25 के साथ रहती थी, तब उसके तीन शावक भी हुए थे।

मां बनने के कुछ माह बाद भी वह टी-25 के साथ रह रही थी। इस बीच उसका रणथम्भौर के कचीदा वन क्षेत्र में बाघ टी-28 से झगड़ा हुआ। इसके बाद बाघिन अपने शावकों के साथ वहां से निकलकर भदलाव की पहाड़ी क्षेत्र में विचरण करने लगी। 

वर्ष 2013 के बाद उसके पगमार्क व फोटो नहीं मिले। वनाधिकारियों ने बाघिन को तलाश भी किया, लेकिन आज तक कोई पता नहीं चला। 

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