बेड खाली और बेंच पर उपचार, क्योंकि वार्ड में जाने का झंझट नहीं पालना चाहते

सांभरलेक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के वार्डों में बेड खाली रहने के बावजूद रोगियों को बरामदे में बिछी बेंच पर भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। नर्सिंग स्टाफ वार्ड में जाने के झंझट से बचने के लिए भर्ती काउंटर के बाहर बरामदे में भर्ती कर लेते हैं।

By: Abhishek sharma

Published: 16 Apr 2016, 11:56 PM IST

गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। उल्टी, दस्त सहित अन्य मौसमी बीमारियों के रोगी आने लगे हैं, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के वार्डों में बेड खाली रहने के बावजूद रोगियों को बरामदे में बिछी बेंच पर भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। 50 बेड वाले स्वास्थ्य केन्द्र में रोजाना लगभग 30-40 रोगी भर्ती होते हैं, लेकिन नर्सिंग स्टाफ वार्ड में जाने के झंझट से बचने के लिए भर्ती काउंटर के बाहर बरामदे में भर्ती कर लेते हैं। वार्डों में बिछे पलंगों की बेडशीट पर जमा धूल इसकी गवाही दे रही हैं कि यहां रोगी भर्ती किए कई दिन हो गए।
सीएचसी में लगी रहती है मरीजों की भीड़
क्षेत्र के सर्वाधिक बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हालांकि चिकित्सकों के दो पद रिक्त होने के वाजूद फिजिशियन, स्त्री रोग, शिशु रोग एवं दंत रोग विशेषज्ञ सहित कुल आठ चिकित्सक कार्यरत हैं। इससे डॉक्टरों के पास रोगियों की सुबह-शाम भीड़ लगी रहती है। रोजाना औसतन 35 रोगी भर्ती भी किए जाते हैं, लेकिन नर्सिंग स्टाफ रोगियों को वार्ड में भर्ती नहीं कर बरामदे में ही भर्ती कर लेते हैं।

सीएचसी का ओवरऑल हाल
50 बेड
30-40 रोगी
50-60 प्रसव हर माह
500-600 का आउटडोर रोजाना
02 पद खाली चिकित्सकों के

मानो कई दिन में की गई हो सफाई
इतना बड़ा स्वास्थ्य केन्द्र होने के बावजूद यहां एक ही सफाई कर्मी का पद स्वीकृत है। आश्चर्य यह कि यह पद भी काफी समय से खाली पड़ा है। सफाई नहीं होने से संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। जगह-जगह दीवारों पर गंदगी जमा हो रही है। ऐसा लगता है कि वहां झाडू ही कई दिन में निकाली जाती है।
हां, बरामदे में करते हैं भर्ती
हां, मरीजों को बरामदे में भर्ती करते हैं। बरामदे में उन मरीजों को भर्ती किया जाता है जो सामान्य रोगी होती हैं या फिर जिन्हें जल्द छुट्टी देने होती है। दूसरी ओर स्वास्थ्य केन्द्र में नर्सिंग ग्रेड प्रथम के तो सभी पद भरे हुए हैं, लेकिन द्वितीय ग्रेड के 10 में से सात पद खाली पड़े हैं, इससे कामकाज के दौरान परेशानी तो होती है।
डॉ. महेशकुमार वर्मा, प्रभारी, सीएचसी, सांभरलेक

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