भीख मांगने वाले हाथ दे रहे दो वक्त का निवाला

सोपान लाया जिंदगी में ‘भोर’
जो कल तक सडक़ों पर मांगते थे भीख
आज हजारों के लिए बना रहे 2 वक्त का निवाला
भीख मांगने वाले हाथ कर रहे मानवता की सेवा

By: Rakhi Hajela

Updated: 23 May 2021, 05:57 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India



जयपुर, 23 मई
कभी शहर के चौराहों पर हाथ फैलाकर भीख मांगने वाले हाथ हजारों लोगों के लिए ना केवल खाना बना रहे हैं बल्कि जरूरतमंदों पर भोजन पंहुचा कर मानवता की सेवा कर रहे हैं। दरअसल अक्षय पात्र फाउंडेशन की ओर से कोविड काल के दौरान में गरीब, असहाय और अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों और उनके परिजनों के लिए भोजन पहुंचाने का काम किया जा रहा है और इस काम को अंजाम दे रहे हैं कल तक खुद मांग कर अपनी गुजर बसर करने वाले लोग। जिन्हें आरएसएलडीसी ने सहारा दिया और सौपान संस्थान ने दी स्किल डवलपमेंट की ट्रेनिंग।
रोज तैयार करते हैं साढ़े पांच हजार लोगों का खाना
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की शहर को बैगर फ्री बनाने की योजना के तहत कौशल विकास एवं आजीविका विकास निगम यानी आरएसएलडीसी ने जनवरी में भिक्षुक ओरिएंटेशन एंड रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम (भोर) शुरू किया था और 40 भिक्षुकों को फुटपाथ से लाकर उन्हें स्किल डवलपमेंट का प्रशिक्षण दिया। यह प्रशिक्षण उन्हें सौपान संस्थान ने दिलवाया। इस दौरान उन्हें रहने खाने के साथ 225 रुपए प्रतिदिन स्टाइपेंड भी दिया गया और आज यह इस काबिल हो गए हैं कि जरूरतमंदों की मदद कर पा रहे हैं। भोर कार्यक्रम के ये लाभार्थी कभी लाइन में लग कर भोजन का इंतजार करते थे लेकिन आज या समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। लाभार्थी कहते हैं कि हमारे पास देने को कुछ नहीं है लेकिन हम श्रमदान तो दे ही सकते हैं।
कैसे चल रहा है प्रोग्राम
15-15 के बैच में ये लाभार्थी रोज अक्षयपात्र की रसोई में खाना बनाते है या स्टोर में रख रखाव करते हैं। इनकी अलग अलग टीम बना दी जाती हैं, कोई आटा लगाता है, कोई रोटी बनाने की मशीन पर काम करता है और कोई रोटी पर घी लगाता है। एक टीम दाल बनाती है तो दूसरी टीम सब्जी। किचन का कोई काम ऐसा नहीं है जो भोर कार्यक्रम के लाभार्थी नहीं करते। इसके बाद बारी आती है इस पैक किए हुए समान को अलग अलग सेंटर्स पर पहुंचाना और फिर खाने का वितरण। खाना इंद्रा रसोई के माध्यम से सभी जरूरतमंदों को दिया जाता है। यहां इन्हें कोई मानदेय नहीं दिया जाता सभी अपनी इच्छा से काम कर रहे हैं।यहां तैयार किया गया खाना पूरे जयपुर में जाता है, गरीबों को वितरित होता है साथ ही कोविड के मरीजों और उनके परिजनों तक पहुंचता है।
इनका कहना है,
हमें केटरिंग की ट्रेनिंग दी गई थी। जिसमें हमें खाना बनाना सिखाया गया। अब हम यहां आकर खाना बनाते हैं, उसकी पैकिंग करके जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाते हैं। मुझे यहां काम करना अच्छा लग रहा है। कभी सोचा नहीं था कि हम भी कभी किसी और की मदद कर सकेंगे।
विजय
कुछ महीने पहले हमें राजपूत छात्रावास लाया गया था। वहीं पर रहता था, कई ट्रेनिंग वहां मुझे मिली, अब मैं अपने साथियों के साथ मिलकर रोज खाना बनाता हूं। जिसे पूरे शहर में भेजा जाता है। यह काम करके मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। आगे भी इसी तरह से काम करना चाहता हूं।
तेज सिंह
जनवरी में हमने इन्हें ट्रेनिंग देना शुरू किया था। कैटरिंग के साथ कई और प्रशिक्षण भी प्रदान किए गए फिर अक्षयपात्र से जुडऩे का मौका मिला तो इन्हें यहां लेकर आए। तकरीबन 40 प्रशिक्षणार्थी नियमित रूप से खाना बना रहे हैं जो जरूरतमंदों के काम आ रहा है।
सुभाष, सेंटर मैनेजर।
शुरू के एक दो दिन काम समझाना पड़ा लेकिन अब यह खुद ही सबकुछ संभाल रहे हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि लॉकडाउन के बाद भी इन्हें रोजगार मिल सके। यह लोग तीन शिफ्टों में काम कर रहे हैं। हमने आरएसएलडीसी के सहयोग से भोर कार्यक्रम के तहत इन्हें ट्रेनिंग प्रदान की थी जो आज इनके काम आ रही है।
जितेंद्र प्रताप, डायरेक्टर, सोपान

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