ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर भर्ती को लेकर आई बड़ी खबर, सीएमएचओ को निर्देश जारी

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर भर्ती को लेकर आई बड़ी खबर, सीएमएचओ को निर्देश जारी

Dinesh Saini | Updated: 09 Jul 2019, 10:50:47 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Rural Health Centers Recruitment : सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती (Doctors Bharti ) में स्वीकृत पदों की तुलना में करीब तीन गुना अधिक डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। वहीं अब सरकार ने अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस ( UTB ) पर डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी कर ली है...

जयपुर। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती (doctors s Bharti ) में स्वीकृत पदों की तुलना में करीब तीन गुना अधिक डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। वहीं अब सरकार ने अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस ( UTB ) पर डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी कर ली है। ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों ( Rural Health Centers Recruitment ) पर डॉक्टरों के पद भरने के लिए पिछली भर्तियों के प्रतीक्षारत डॉक्टरों या नई भर्ती से करने के बजाय अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस पर भरने के लिए जिलों के सीएमएचओ को निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रदेश के करीब 3 हजार छोटे बड़े सरकारी अस्पतालों में करीब 3 हजार डॉक्टरों की कमी है। सरकार की ओर से चिकित्सा अधिकारी (एमओ) और मेडिकल कॉलेजों में निकाली जा चुकी भर्तियों से भी सच सामने आ चुका है। एमओ की एक भर्ती में करीब 1000 पदों के लिए करीब 2600 आवेदन मिले तो सहायक आचार्य के दस पदों के लिए भी दस गुना से अधिक डॉक्टर भर्ती में आवेदन कर रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों व पुराने कॉलेजों में सीटों की बढोत्तरी के बाद एमबीबीएस सीटों की संख्या करीब दोगुनी हो चुकी है।


सैंकडों डॉक्टर कर रहे हैं प्रतीक्षा
प्रदेश में डॉक्टरो की पिछली भर्तियों के प्रतीक्षारत पास डॉक्टरों का कहना है कि वे सरकार उनकी भर्ती करे तो वे सरकारी सेवा में काम करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि वे भर्ती की परीक्षा भी पास कर चुके हैं, लेकिन सरकार नई भर्ती निकालती है तो उससे पहले उन्हें रखा जाना चाहिए। जिससे प्रदेश को तत्काल डॉक्टरों की उपलब्धता होगी। इनका कहना है कि इसके बावजूद सरकार यूटीबी से डॉक्टरों की भर्ती का अस्थायी जुगाड़ करने की तैयारी कर रही है।

आधे पद ही होते हैं स्वीकृत
इस कमी के पीछे राज्य सरकार का कई बार यह बयान सामने आया है कि प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी के बजाय, सरकार की ओर से भर्ती के समय स्वीकृत किए जाने वाले पदों की कमी है। जितने पद स्वीकृति के लिए चिकित्सा विभाग वित्त विभाग के पास भेजता है, उनमे से सामान्यतया 50 प्रतिशत पदों को ही स्वीकृति मिल रही हैं।

हर साल बन रहे 1000 पीजी डॉक्टर
छोटे अस्पतालों के साथ ही मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की भी ऐसी ही स्थिति है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से हर साल करीब 1000 डॉक्टर पोस्ट ग्रेजुएशन कर निकल रहे हैं। अकेले एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पीजी की इस समय 500 से अधिक सीटे हैं।

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