बड़ा सवाल...गुड़िया से बर्बरता करने वाला गुनाहगार कौन ?

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा, उच्च न्यायालय ने कहा, अभियोजन अपराध की कड़ी से कड़ी जोड़ने में रहा नाकाम, रिहा करने के दिए आदेश

By: KAMLESH AGARWAL

Published: 01 Aug 2020, 10:05 PM IST

जयपुर।

अलवर पुलिस पर एक बार फिर से बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। सवाल है आखिर पांच साल की मासूम गुड़िया की बर्बरता के साथ हत्या करने वाला गुनाहगार कौन है ? जिसे पुलिस ने आरोपी बनाकर न्यायालय में पेश किया था और ट्रायल कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद वाहवाही लूटी थी उसे हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है न्यायालय ने कहा कि अभियोजन मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ने में नाकाम रहा है।
अलवर के बहरोड़ थाना इलाके में हुई पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पाक्सो न्यायालय ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। राजस्थान उच्च न्यायालय में डेथ रेफरेंस और आरोपी पक्ष की ओर से पेश अपील पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सीके सोनगरा ने आरोपी को संदेश का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने कहा कि पुलिस और अभियोजन मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ने में नाकाम रहा है। इसी के साथ पारिस्थितजन्य सबूतों को गवाहों और फोरेंसिक जांच से साबित करने में नाकाम रहा है। आरोपी के अधिवक्ता कपित गुप्ता और कुलदीप यादव ने बताया कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को आरोप मुक्त किया है। अदालत ने यह भी कहा है कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आरोपी को फंसाया गया हो। आखिर सवाल उठता है कि पुलिस ने जांच और अभियोजन ने इतनी बड़ी खामियां कैसे छोड़ दी और आखिर मासूम का गुनाहगार कौन है।

ये रही खामियां

1 आरोपी बच्ची को जिस दुकान पर लेकर गया था उस दुकानदार को पुलिस ने अदालत में पेश नहीं किया

2 बच्ची के शव और पोस्टमार्टम के बाद भेजे गए सीमन नमूनों की आरोपी के सीमन से मिलान की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पेश नहीं हुई।
3 जिस खंडर से बच्ची का शव मिला उसके मालिक को न्यायालय में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया।

4 आरोपी को 2 फरवरी 2015 को गिरफ्तार किया गया लेकिन उसका मेडिकल चार अप्रेल को करवाया गया।

यह है मामला

पुलिस स्टेशन बहरोड़ अलवर में 2 फरवरी 2015 को मामला दर्ज हुआ। जिसमें पांच साल की बच्ची के एक फरवरी से लापता होने की जानकारी दी देते हुए राजकुमार उर्फ धर्मेद्र पर शक जाहिर की। पुलिस ने दावा किया कि पूछताछ में राजकुमार ने हत्या की बात कबूल की और उसी की निशानदेही पर एक खंडर के बंद कमरे से बच्ची का शव बरामद किया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 363,366,376.2.1, 302, 201 और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में दोषी माना और 12 जून 2019 को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

KAMLESH AGARWAL Desk
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