जिम्मेदारी बड़ी, सुविधाएं थोड़ी

जिम्मेदारी बड़ी, सुविधाएं थोड़ी

Abhishek Sharma | Publish: Feb, 03 2016 11:37:00 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

कस्बा क्षेत्र में हजारों के जान माल की सुरक्षा का जिम्मा। फोन की घंटी बजने के साथ ही दौडऩे को तत्पर। कुछ एेसी जिम्मेदारियां है अग्निशमन कार्मिकों की,  लेकिन यहां दमकल और इसके कर्मचारियों को स्वयं की छत नसीब नहीं हो रही है। नगर निकाय कोटे से बना फायर स्टेशन एक साल से पालिका प्रशासन की अनदेखी के कारण धूल फांक रहा है। वाहवाही लूटने के चक्कर में पालिका प्रशासन ने 10 लाख रुपए की लागत से बने भवन का मंत्री के हाथों उद्घाटन करवाया, लेकिन सालभर बीत जाने के बावजूद बिजली-पानी की सुविधाएं आज तक नहीं जुटा पाया है।

कस्बा क्षेत्र में हजारों के जान माल की सुरक्षा का जिम्मा। फोन की घंटी बजने के साथ ही दौडऩे को तत्पर। कुछ एेसी जिम्मेदारियां है अग्निशमन कार्मिकों की,  लेकिन यहां दमकल और इसके कर्मचारियों को स्वयं की छत नसीब नहीं हो रही है। नगर निकाय कोटे से बना फायर स्टेशन एक साल से पालिका प्रशासन की अनदेखी के कारण धूल फांक रहा है।
वाहवाही लूटने के चक्कर में पालिका प्रशासन ने 10 लाख रुपए की लागत से बने भवन का मंत्री के हाथों उद्घाटन करवाया, लेकिन सालभर बीत जाने के बावजूद बिजली-पानी की सुविधाएं आज तक नहीं जुटा पाया है। इसके कारण भवन का उपयोग नहीं हो रहा है। इससे अति आवश्यक सेवाओं में शामिल दमकल को आज यहां तो कल वहां ठौर संभालनी पड़ रही है। हालांकि पालिका प्रशासन बोरिंग और पानी टैंक के निर्माण के लिए टैण्डर जारी किए जाने और बिजली तथा पानी के लिए विद्युत और जलदाय विभाग में पत्रावली जमा करवाने की हामी भर रहा है। कस्बे के खातेड़ी मोड़ पर बने भवन में एक स्टोर कक्ष और एक स्टाफ कक्ष का निर्माण तथा सीसी फर्श बनवाया है। मगर बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है।
दमकल पर तीन शिफ्टों पर कर्मचारी नियुक्त है। पहले शिफ्ट सुबह 6 से 2, दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 से रात्रि 10 और रात्रि 10 से सुबह 6 बजे तक चलती है। प्रत्येक शिफ्ट में दो फायरमैन और एक चालक ड्यूटी पर है। दो उपखण्ड इलाके में दौड़ लगाने वाली दमकल पर कर्मचारी ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
उधार के पानी पर निर्भर
मजे की बात तो यह है कि दमकल को भरने के लिए सरकारी स्तर पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। अग्निकाण्ड के दौरान दमकल कर्मियों को उधार के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्हें कस्बे से करीब एक किलोमीटर दूर जाकर दमकल को भरवाना पड़ता है।
पहले थाना और अब कृषि मंडी
जगह के अभाव में दमकल को पहले थाने में खड़ी की जाती थी, लेकिन रोजाना की आवाजाही से परेशान पुलिस ने गाड़ी खड़ी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद इसे कृषि उपज मंडी के एक कोने में खड़ी की जा रही है। यहां दमकल के लिए छाया है ना ही कर्मचारियों के लिए स्टाफ कक्ष। ड्यूटी कर्मचारी यहीं कृषि मंडी के उधार के कमरों में ठहरते हैं।
धूप में खराब हो सकते हैं उपकरण
पालिका में करीब दो साल पहले आधुनिक तकनीकी से बनी दमकल उपलब्ध कराई गई थी। अग्निशमनकर्मियों की मानें तो दमकल खड़ी करने के लिए छायादार शेड होना चाहिए, ताकि धूप और बारिश से बचाया जा सके। बारिश और धूप से आधुनिक तकनीकी के उपकरणों के खराब होने का अंदेशा रहता है।
दो तहसीलों का भार
यहां दमकल पर शाहपुरा पंचायत समिति की 33 और विराटनगर पंचायत की 29 ग्राम पंचायतों का भार है। इसके अलावा आमेर और पावटा तक के इलाके में भी अग्निकांड होने पर दमकल को दौड़ लगानी पड़ती है।
इनका कहना है...
नलकूप के लिए टेण्डर जारी किए हैं। बिजली और पानी के लिए विद्युत व जलदाय विभाग में पत्रावली जमा करवा दी है। सुविधाएं होते ही दमकल को शिफ्ट करवा दिया जाएगा।
रजनी पारीक, पालिकाध्यक्ष शाहपुरा

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