'रेल फाटकों की समस्या के समाधान के लिए बाईपास ही एकमात्र विकल्प'

बीकानेर में रेल फाटकों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए बाईपास ही एकमात्र विकल्प है। इसके लिए बीकानेर का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक कर समस्या के समाधान संबंधी सुझाव देगा।

बीकानेर में रेल फाटकों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए बाईपास ही एकमात्र विकल्प है। इसके लिए बीकानेर का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठक कर समस्या के समाधान संबंधी सुझाव देगा। साथ ही, रेल मंत्री के साथ भी बैठक कर राज्य सरकार का पक्ष रखा जाएगा, जिसमें बीकानेर में रेल बाईपास बनाने पर सहमति हो सके, इसके लिए उच्च स्तर पर सार्थक प्रयास किए जाएंगे। यह बात ऊर्जा एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने बीकानेर में रेल बाईपास निर्माण की मांग के संबंध में आए शिष्टमंडल से कही। डॉ. कल्ला ने कहा कि रेल बाईपास बनाने के लिए वर्षों से प्रयासरत हैं और शीघ्र ही इस पर निर्णय करवा कर आमजन को राहत पहुंचाई जाएगी।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्षों पहले भी रेल मंत्रालय को बाईपास बनाने के लिए 61 करोड़ 62 लाख रुपए दिए गए थे। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह रेलवे महाप्रबंधक से मिलकर रेल बाइपास बनाने के लिए उन्हें बताया गया था, तब महाप्रबंधक ने सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमति व्यक्त की थी, कि बीकानेर में रेल फाटकों की समस्या का एकमात्र समाधान रेल बाईपास ही है। डॉ. कल्ला ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में रेलवे की ओर से देश में रेल यातायात विद्युत आधारित होगा और रेलवे सभी स्थानों पर डबल लाइन भी डालेगा। ऐसे में बीकानेर के कोटगेट सहित अन्य स्थानों पर न तो विद्युत लाइन से चलने वाली रेल निकल पाएगी और न ही डबल लाइन बन सकेगी, ऐसे में रेल मंत्रालय को बाईपास बनाना अनिवार्य होगा। अगर अभी रेल मंत्रालय राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से बाईपास का निर्माण कार्य करता है, तो यह काम तेजी से और बेहतर ढंग से पूरा हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि पहले जब एलिवेटेड रोड बनाने की बात हुई थी तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अभियंताओं का यह कहना था कि यहां तकनीकी रूप से एलिवेटेड रोड नहीं बन सकती है, साथ ही एलिवेटेड रोड से स्थानीय नागरिकों को भी परेशानी होगी। इस दौरान पूर्व विधायक और वरिष्ठ अधिवक्ता आर के दास गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1992 में डॉ. कल्ला के नेतृत्व में रेल मंत्रालय के साथ आयोजित बैठक में यह निश्चित किया गया था कि बड़ी लाइन का काम लालगढ़ से बीकानेर तक होने दिया जाए और फिर रेल मंत्रालय जल्द ही बाईपास भी बना देगा। रेलवे के उच्च अधिकारियों की ओर से बाईपास निर्माण के आश्वासन के बाद ही बड़ी लाइन का काम शुरू करने में हम लोगों ने सकारात्मक सहयोग किया था मगर रेलवे की ओर से अपना वादा नहीं निभाया गया और आज तक बाईपास का निर्माण नहीं हो पाया है।

anant Desk
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