बर्ड फ्लू का खतरा:मकर संक्रांति पर कैसे होगा घायल परिंदों का इलाज

मकर संक्रांति पर कैसे मिलेगा इलाज
कैसे होगी संक्रमित पक्षी की पहचान
वन विभाग और पशुपालन विभाग ने साधी चुप्पी
परिंदों को बचाने का काम रही संस्थाएं कैसे करेंगी गाइडलाइन की पालना
अब तक मारे जा चुके हैं ढाई हजार परिंदे

By: Rakhi Hajela

Updated: 10 Jan 2021, 10:44 PM IST

Rakhee Hajela, [10.01.21 18:31]
परिदों पर आफत
मकर संक्रांति पर कैसे मिलेगा इलाज
कैसे होगी संक्रमित पक्षी की पहचान
वन विभाग और पशुपालन विभाग ने साधी चुप्पी
परिंदों को बचाने का काम रही संस्थाएं कैसे करेंगी गाइडलाइन की पालना


प्रदेश की राजधानी जयपुर सहित विभिन्न जिलों में परिंदों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक प्रदेश में ढाई हजार परिंदे मारे जा चुके हैं। वहीं दूसरी ओर मकर संक्रांति पास आने से पक्षी प्रेमियों की चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि यदि पक्षियों की मौत के मामले इसी प्रकार सामने आते रहे तो मकर संक्रांति के दौरान मांझे से घायल होने वाले परिंदों को इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाएगा, वहीं वन विभाग इस मुद्दे को बैठक कर खानापूर्ति करने में लगा हुआ तो पशुपालन विभाग ने इस मुद्दे को लेकर ही चुप्पी साध रखी है। वहीं मुख्यमंत्री ने बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। आपको बता दें कि अब तक 2950 परिंदों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 2289 कौए, 170 मोर और 156 कबूतरों के साथ 335 अन्य पक्षी हैं।
पीपीई किट पहनना है अनिवार्य
गौरतलब है कि बर्ड फ्लू को देखते हुए सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है। इस गाइडलाइन के मुताबिक फील्ड में कार्यरत कार्मिकों और अधिकारियों को हाथ में दस्तानों के साथ पीपीई किट पहनना अनिवार्य है। जिससे यदि कहीं कोई मृत पक्षी पाया जाता है तो उसे बिना हाथ लगाए सावधानी से निस्तारण किया जा सके। निस्तारण करने के लिए गड्ढा खोद कर उसमें पक्षी को जलाए जाने के निर्देश दिए हैं। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो संक्रमण इंसानों में भी पहुंच सकता है।
सामने आएगी यह परेशानी
मकर संक्रांति के दौरान घायल परिंदों को बचाने के लिए काम करने वाले एनजीओ के सामने अब समस्या पैदा हो गई है कि वह इन परिंदों को बचाने के लिए क्या करें। जो पक्षी घायल है वह संक्रमित है अथवा नहीं इसका पता कैसे चलेगा। बिना पीपीई किट पहने घायल पक्षी को अस्पताल या चिकित्सक तक कैसे ले जाया जाएगा क्योंकि किसी भी परिस्थिति में पक्षी के संक्रमित होने या नहीं होने की पहचान करना संभव नहीं है। इतना ही नहीं बर्ड फ्लू के कारण अब आमजन भी घायल पक्षियों को इलाज के लिए नहीं ला सकेंगे तो क्या ऐसे में इन परिंदों को भगवान भरोसे ही छोडऩा होगा।
गौरतलब है कि न केवल मकर संक्रांति के दिन बल्कि इससे कई दिन पहले और बाद तक पंतगबाजी का माहौल शहर में रहता है ऐसे में कई एनजीओज कई दिनों तक परिंदों को बचाने और उनका इलाज करने के लिए अभियान चलाती हैं। कंट्रोल रूम बनाकर और कैम्प लगाकर काम करती हैं। जहां इनका इलाज किया जाता है। सुबह से लेकर देर रात तक कई दिनों तक अभियान चलाया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में चिकित्सक और कार्यकर्ता काम करते हैं। ऐसे में सभी के लिए पीपीई किट की उपलब्धता कहां से होगी यह एक बड़ा सवाल बन गया है जिसका जवाब देने के लिए फिलहाल वन विभाग और पशुपालन विभाग तैयार नहीं हैं।
शनिवार को जयपुर जू में इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं की बैठक आयोजित की गई जिसमें अंतत: एक ही निर्णय लिया गया कि आमजनता से पंतग नहीं उड़ाने की अपील की जाए लेकिन इस अपील की सफलता पर खुद एनजीओ और वन विभाग के अधिकारी संशय में हैं।

मुख्यमंत्री ने दिए सावधानी बरतने के निर्देश
मुख्यमंत्री गहलोत ने भी सोशल मीडिया पर बर्ड फ्लू के फैलने और इसके इंसान में फैलने की आशंका जताते हुए सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि बिना पीपीई किट पहने पक्षियों के बीच नहीं जाएं। पक्षियों को दाना पानी डालने वालों को भी सावधानी बरतने के लिए कहा है। साथ ही किसी भी पक्षी के मरे दिखने पर इसकी सूचना कंट्रोल रूम नंबर 0141 2374617 पर देने को कहा है।

पशुपालन विभाग उठाए जिम्मेदारी

पिछले २२ साल से शहर में ऑपरेशन फ्री स्काई चला रहे वल्र्ड संगठन की निदेशक नम्रता सक्सेना का कहना है कि बिना पीपीई किट परिंदों को उठाना, उनका इलाज करना संभव नहीं है। पशुपालन विभाग को इसमें आगे आना चाहिए। या तो सरकार हमें पीपीई किट उपलब्ध करवाए या फिर पशुपालन विभाग मकर संक्रांति पर परिंदों को बचाने के लिए कैम्पेन चलाए। जिसमें वल्र्ड संगठन उनका सहयोग करेगा। बर्डफ्लू की वजह से मांझे की डोर से घायल परिंदों को बिना इलाज के मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। संक्रांति पर मांझे की डोर से बड़ी संख्या में परिंदे घायल होते हैं लेकिन इस बार बिना सुरक्षा इंतजाम उन्हें छूना किसी के लिए संभव नहीं। आमजनता को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि वह परिंदों को इलाज के लिए लाते हैं तो बिना पीपीई किट पहने उन्हें हाथ नहीं लगाएं

Rakhi Hajela Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned