1100 करोड़ मिले तो शहर को मिले शटडाउन से मुक्ति

1100 करोड़ मिले तो शहर को मिले शटडाउन से मुक्ति
केन्द्र राशि स्वीकृत करे तो बीसलपुर से जयपुर तक अतिरिक्त लाइन बिछाने का काम हो शुरू
बीसलपुर सिस्टम के शटडाउन के कारण पूरे दो दिन पेयजल तक नहीं मिलेगा बीसलपुर से पानी
केन्द्र ने नहीं दिया पैसा तो विभाग ने किए हैं अपने स्तर पर वैकल्पिक इंतजाम

By: PUNEET SHARMA

Published: 23 Jul 2020, 08:43 AM IST


जयपुर।
बीसलपुर—जयपुर पेयजल परियोजना की पेयजल आपूर्ति लाइन 2021 की जनसंख्या की पानी की जरूरत के हिसाब से बिछाई थी। लेकिन अब जयपुर की बढ़ती आबादी के लिए पानी की जरूरतें तीन गुना बढ़ गई हैं और दबाव में बीसलपुर—जयपुर पेयजल आपूर्ति सिस्टम चरमराने लगा है। जलदाय विभाग बीसलपुर से जयपुर तक एक अतिरिक्त लाइन बिछाना चाहता है लेकिन 1100 करोड़ का प्रोजेक्ट 2017 से केन्द्र सरकार के पास लंबित है। इस स्थिति में एक दिन रख रखाव के शटडाउन के कारण शहर के लोगों को दो दिन बीसलपुर से पेयजल पेयजल नहीं मिलने जैसी समस्या से दो दो हाथ होना पड़ रहा है।
इंतजार हुआ लंबा तो विभाग ने किया वैकल्पिक इंतजाम
अभी मौजूदा बीसलपुर पेयजल लाइन से शहर की जरूरत के हिसाब से 500 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। अब विभाग ने पेयजल की आवश्कताओं को देखते हुए बीसलपुर फेज द्वितीय के तहत 170 एमएलडी पानी बीसलपुर से और लिया जाएगा। अगर मौजूदा लाइन से इस अतिरिक्त पानी को लिया जाता है तो लाइन के फटने का खतरा है। लिहाजा विभाग ने अपने स्तर पर ही मौजूदा लाइन से से ही इस अतिरिक्त पानी को लेने के लिए रेनवाल में पानी के प्रेशर को कम करेगा। जिससे 2024 तक अतिरिक्त पानी से शहर की पेयजल आवश्यकताएं पूरी हो सकें।
2017 से केन्द्र के स्तर पर लंबित है 1100 करोड
बीसलपुर से जयपुर तक एक अतिरिक्त पेयजल लाइन बिछाने की परियोजना विभाग ने 2017 में केन्द्र सरकार को भेजी थी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का पैसा स्वीकृत नहीं होने से विभाग अब वैक्लिपक इंतजामों के आधार पर 2024 तक पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ती करने की योजना बना रहा है।
रखरखाव का ठेका दो फर्मों को
विभाग ने बीसलपुर—जयपुर पेयजल लाइन के रखरखाव का ठेका पांच पांच साल के लिए दो फर्मों को 77 करोड़ रुपए में दे रखा है। चूंकि सिस्टम पूरे साल चौबीस घंटे काम करता है ऐसे में मंहगे पुर्जे घिस जाते है। इस सिस्टम के सालाना रख रखाव पर 14 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च होता है।
वर्जन
अगर 1100 करोड़ रुपए स्वीकृत हो जाएं तो जयपुर शहर की पेयजल समस्या लंबे समय के लिए समाप्त हो सकती है। लेकिन तीन साल से यह परियोजना अटकी हुई है। हमने कुछ वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। मौजूदा स्थिति में रख रखाव के लिए शटडाउन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
देवराज सोलंकी
अतिरिक्त मुख्य अभियंता
जयपुर द्वितीय

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