अब BJP ने शुरू किया '#Dictator_Gehlot' कैम्पेन, मेयर-पार्षद निलंबन को बताया तुगलकी फरमान

जयपुर 'ग्रेटर' मेयर और पार्षदों के निलंबन का मामला, गहलोत सरकार के खिलाफ भाजपा का 'हल्ला बोल' जारी, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सरकार को घेरने में जुटी भाजपा, नेता-कार्यकर्ता-समर्थक ट्रेंड करवा रहे '# डिक्टेटर गहलोत'

 

By: nakul

Published: 09 Jun 2021, 12:50 PM IST

जयपुर।

जयपुर में भाजपा की मेयर समेत चार पार्षदों की निलंबन कार्रवाई का मुद्दा गर्माया हुआ है। इस मामले को लेकर जहां विपक्षी दल भाजपा न्याय की गुहार के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा चुकी है, तो वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सरकार विरोधी कैम्पेन चलाकर चौतरफा घेरने की कवायद जारी है। इसी क्रम प्रदेश भाजपा ने आज सुबह से गहलोत सरकार के खिलाफ हैश टैग 'डिक्टेटर गहलोत' कैम्पेन शुरू किया।

 

कैम्पेन को ट्रेंड करवाने के लिए वरिष्ठ नेताओं से लेकर तमाम भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक इस हैश टैग को काम में लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी प्रतिक्रियाएं दाल रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित राजस्थान से भाजपा के सांसद और विधायक भी कैम्पेन में शामिल हुए और अपनी प्रतिक्रियाएं जारी की हैं।

 

नेताओं ने जयपुर ग्रेटर नगर निगम मेयर समेत चार पार्षदों पर निलंबन कार्रवाई को गहलोत सरकार का तुगलकी फरमान करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में सरकार अपने आदेशों से लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रही है।

 

पूनिया का गहलोत पर 'अटैक'
वर्चुअल कैम्पेन शुरू करते हुए प्रदेशाध्यक्ष डॉ पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा बयानी वार किया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजनीति में आने के दौरान जून, 1975 को देश में लगे आपातकाल का समर्थन किया था। जब घुट्टी ही तानाशाही की पी हो तो, गुण भी ऐसे ही होंगे।'

 

पूनिया ने कहा, 'जो सरकार अपने सभी आदेश रात के अंधेरे में निकालती हो, अपनी जनता, जनप्रतिनिधी और कार्यकर्ताओं को अंधेरे में रखती हो। लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए लोगों को आधी रात में हटा देती हो, उसका मुखिया क्या होगा?'

 

जनता देगी 'तानाशाही' का जवाब
उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा, 'गहलोत सरकार ने सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर जयपुर ग्रेटर मेयर एवं पार्षदों का निलंबन करके संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करने का कुकृत्य किया है। सन् 1975 के आपातकाल को दोहराने वाली इस कांग्रेस सरकार की तानाशाही का जनता माकूल जवाब देगी।'


राठौड़ ने आगे कहा, 'गहलोत सरकार ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 में प्रदत्त शक्तियों का दुरुपयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने मेयर व भाजपा पार्षदों को ना सुनवाई का अवसर दिया और ना ही प्रारम्भिक जांच करना मुनासिब समझा। जनता सब देख रही है।'


एक अन्य प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा, 'गहलोत सरकार ने विधि विरुद्ध जाकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को निलंबित कर अबोध शस्त्र हाथ में लिया है जो इनके लिए ही मारक सिद्ध होगा। लोकतंत्र की धुरी 'स्थानीय निकाय' में भाजपा के बहुमत से घबराई कांग्रेस सरकार के तानाशाही कृत्य का जनता लोकतांत्रिक ढंग से जवाब देगी।'

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