सात सालों में दोगुने हो गए निजी ब्लड बैंक, कुछ बैंक बांट रहे रक्तदान के बदले प्रलोभन के पर्चे

प्रदेश के रक्तदान शिविरों में चल रही जमकर पोल, जिम्मेदार अब भी मौन

— साढ़े चार महीने से औषधि नियंत्रण संगठन के चार अधिकारी कर रहे जयपुर के 38 ब्लड बैंकों की जांच, रिपोर्ट अब तक नहीं सौंपी

By: Vikas Jain

Published: 24 Sep 2021, 11:13 AM IST

विकास जैन

जयपुर. प्रदेश में बीते सात सालों के दौरान ब्लड बैंकों के जरिये खून का कारोबार खूब फला—फूला है। निजी ब्लड बैंकों को धड़ल्ले से अनुमति दिए जाने की स्थिति यह है कि वर्ष 2015 से
वर्ष 2021 के बीच ही लाइसेंसधारी निजी ब्लड बैंकों की संख्या 30 से बढ़कर 61 हो चुकी है। जबकि इससे पहले वर्ष 1995 से 2014 के बीच कुल 30 ब्लड बैंक प्रदेश में थे। जरूरतमंदों की सुविधा के लिहाज से यह संख्या बढ़ना बेहतर माना जा सकता है, लेकिन हाल ही में उत्तरप्रदेश में पकड़े गए रैकेट में राजस्थान का रक्त दूसरे राज्यों में पांच गुना अधिक दामों में बेचे जाने का खुलासा होने के बाद प्रदेश के सिस्टम की पोल खुल गई है। जिम्मेदार अधिकारी इसके बाद भी अब तक एक्शन मोड में नहीं आए हैं।

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि औषधि नियंत्रण संगठन की मॉनिटरिंग फेल होने का फायदा इनमें से कुछ ब्लड बैंक जमकर उठा रहे हैं। यहां तक की रक्तदान शिविरों के लिए लालच भरे प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं। दरअसल, हाल ही में यूपी में पकड़े गए रक्त रैकेट में खुलासा हो चुका है कि तस्कर राजस्थान के ब्लड बैंकों से 1200 रुपए में रक्त खरीदकर दूसरे राज्यों में 6 हजार रुपए तक में बेच रहे हैं। प्रदेश में निजी ब्लड बैंकों की जांच के लिए इसी साल साढ़े चार महीने पहले मई में औषघि नियंत्रण संगठन ने चार अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जिनमें से अब तक मात्र एक ने ही अपनी रिपोर्ट सौंपी है। शेष की रिपोर्ट का इंतजार आला अधिकारी अब तक भी कर रहे हैं।

जयपुर में तीन गुना बढ़ गए ब्लड बैंक

सामने आया कि अकेले जयपुर शहर में ही निजी ब्लड बैंकों की संख्या सात सालों में तीन गुना बढ़कर 12 से 38 हो चुकी है। जयपुर शहर में निजी ब्लड बैंकों का दबदबा इतना हो चुका है कि सरकारी अस्पतालों से भी वहां तक जरूरतमंदों को भेजा जा रहा है और संगठन की मॉनिटरिंग ना के बराबर है।

इस तरह चल रहे बैंक, जांच इसीलिए...मगर रिपोर्ट कहां गई

राजस्थान पत्रिका को राजधानी जयपुर के ही कुछ ब्लड बैंकों के ऐसे पंपलेट भी मिले हैं, जिनमें रक्तदाताओं को विशेष उपहार का प्रलोभन भी दिया गया है। जबकि शिविरों में रक्तदान स्वैच्छिक ही माना जाता है। यह भी सामने आया है कि कुछ सरकारी अस्प्तालों के ब्लड बैंकों में भी कुछ निजी ब्लड बैंकों के फार्म रखे जा रहे हैं।

ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें एक छोटे ब्लड बैंक ने भी एक ही दिन में पांच—छह रक्तदान शिविर लगा दिए। जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक इसके लिए दक्ष स्टाफ की पूरी टीम की आवश्यकता होती है। प्राप्त रक्त को उचित तरीके से रखना भी बड़ी चुनौती की तरह है।

इस तरह पसरता गया प्रदेश में खून का कारोबार...

जयपुर

1995 से 2014
सरकारी 4
निजी 12

वर्ष 2015
2
1

वर्ष 2016
1
3

वर्ष 2017
0
6

वर्ष 2018
2
4

वर्ष 2019
0
4

वर्ष 2020
0
5

वर्ष 2021
0
3

अब तक कुल
9
38

...

राजस्थान
वर्ष 1995 से 2014
39
30

वर्ष 2015
2
3

वर्ष 2016
0
5

वर्ष 2017
1
6

वर्ष 2018
10
5

वर्ष 2019
1
7

वर्ष 2020
0
5

वर्ष 2021
0
0

अब तक कुल
53
61

वर्जन

मई में ही हमने जयपुर के 38 ब्लड बैंकों की जांच का जिम्मा चार अधिकारियों को सौंप दिया था। बड़ी जांच में समय तो लगता ही है, जल्द ही उनकी रिपोर्ट मिलेगी। कहीं अनिय मितता और गड़बड़ी मिलने पर कार्यवाही करेंगे।
राजाराम शर्मा, औषधि नियंत्रक, राजस्थान

Vikas Jain Reporting
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