स्टेज 1-2 में इलाज से 90% घटता खतरा

दुनियाभर में महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के मामले देखे जा सकते हैं। उनमेें कैंसर की वजह से होने वाली मौतों में भी यह सबसे बड़ा कारण है। मौतों के पीछे मुख्य वजह जागरूकता का अभाव है। शुरुआती स्टेज में इलाज से मृत्यु का जोखिम 90 फीसदी तक कम हो सकता है।

By: Archana Kumawat

Published: 21 Nov 2020, 05:47 PM IST

मोटापा-धूम्रपान से जोखिम
स्तन कैंसर का जोखिम उन महिलाओं में ज्यादा होता है, जिनके परिवार में किसी सदस्य में भी स्तन या ओवेरियन कैंसर की हिस्ट्री रही हो। इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान, अल्कोहल, लंबे समय तक रेडिएशन एक्सपोजर में काम करना भी इस कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। पहले बच्चे के जन्म के समय मां की उम्र अधिक होना, १२ वर्ष से पहले पीरियड्स शुरू होना और देर से मेनोपॉज आना भी स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ा देता है। स्तन में साधारण गांठ भी कैंसर बना सकती है।
बगल में गांठ होना भी संकेत
यदि आपको बगल में गांठ महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें। इस तरह की गांठ स्तन कैंसर का लक्षण हो सकती है। स्तन में बिना दर्द वाली गांठ होना एवं समय के साथ उसका आकार बढऩा, स्तन के पास त्वचा पर कोई फोड़ा या अल्सर होना (जो जल्दी ठीक न हो), वहां की त्वचा बदलना, सूजन और लालिमा आना, निप्पल से तरल पदार्थ या रक्त का निकलना आदि लक्षण स्तन कैंसर के संकेत हैं। किसी एक लक्षण के आने पर भी तुरंत डॉक्टर का परामर्श लें एवं उचित जांच करवाएं।
45 बाद नियमित जांच कराएं
इस उम्र के बाद साल-दो साल से स्तन की जांच करवानी चाहिए। परिवार में कैंसर का मामला रहा है तो ३० वर्ष से ही सतर्क रहें।
स्टेज 4 में फेफड़ों, लिवर में जोखिम
कैंसर की स्टेज चार में रोग फेफड़ों, लिवर और हड्डियों में भी फैल जाता है। यहां तक की बोनमेरो भी प्रभावित हो सकता है।
शीशे के सामने खड़े होकर करें जांच : हर महीने पीरियड्स शुरू होने के ५ से ७ दिनों में खुद स्तन की जांच करनी चाहिए। शीशे के सामने खड़े होकर अपने दोनों हाथों को कमर के नीचे रख लें और यह देखें कि त्वचा या आकार में कोई बदलाव तो नहीं आया है। नहाते समय निप्पल को दबाकर देखें, यदि रक्त या अन्य तरल का स्त्राव हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
सीधे लेटकर करें जांच : पीठ के बल लेट जाएं। बाएं कंधे के नीचे तकिया लगाएं। बाएं हाथ को सिर के नीचे रखें तथा दाएं हाथ से स्तन पर हल्के दबाव के गांठ की जांच करें। बगल की तरफ से भी जांच करें। यही प्रकिया दाईं ओर से दोहराएं। जांच गोलाई में ही की जानी चाहिए।
समय-समय पर करवाएं मेमोग्राफी : सालभर से या दो साल में एक बार मेमोग्राफी करवाई जानी चाहिए। इसमें गांठ का पता चल जाता है। इसके बाद बायोप्सी से पता लगाया जाता है कि गांठ कैंसर की है या नहीं। गांठ की स्टेज का पता करने के लिए पूरे शरीर की पेट स्कैनिंग (पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी) की जाती है।
हार्मोन थैरेपी भी कारगर
कैंसर की पहली, दूसरी और तीसरी स्टेज में सर्जरी विकल्प है। इसके बाद कीमोथैरेपी या रेडियोथैरेपी दी जाती है। स्टेज चार में जब कैंसर शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करना शुरू कर देता है तो नई हार्मोन थैरेपी से कैंसर की रोकथाम की जा सकती है। इसमें दवा से उपचार किया जाता है।
स्वस्थ जीवन- शैली अपनाएं
मोटापा कम करके स्तन कैंसर का जोखिम कम किया जा सकता है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं। अल्कोहल व धूम्रपान का प्रयोग न करें। दूध के साथ अलसी के बीज लें। लहसुन, पत्तेदार सब्जियां, हल्दी का प्रयोग करें। साथ ही नियमित रूप से व्यायाम एवं योग करें।

Archana Kumawat
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