टूटा सन्नाटा, धरती फिर उगलेगी सोना

प्रदेश की हजारों खदानों में खनन शुरू: मानसून तक चलेगा काम

By: jagdish paraliya

Published: 23 May 2020, 05:13 PM IST

करीब एक माह तक चल सकेगा काम
भीलवाड़ा. करीब दो माह से लॉकडाउन का सन्नाटा अब खदानों में टूट गया है। इसके साथ ही प्रदेश की हजारों खदानों में खनन शुरू हो गया है। इनमें भीलवाड़ा जिले की करीब दो हजार खदानें शामिल हैं। हालांकि अब ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कोरोना के डर के चलते श्रमिक कम संख्या में आ रहे हैं। इसके चलते छोटी खदानों के संचालन में समस्या आ रही है। फिर भी दो माह से बेकार बैठे हजारों श्रमिकों को रोजगार मिल गया है। इसके साथ ही अब खनिज आधारित फैक्ट्रियों भी काम शुरू होने की आस जगी है।
टेक्सटाइल के साथ ही भीलवाड़ा का नाम खनन व्यवसाय के कारण जाना जाता है। लॉकडाउन-४ में मिली छूट के बाद खनन शुरू हो गया है। श्रमिकों के आने-जाने की छूट मिलने के बाद खानों में काम शुरू हो गया है, लेकिन यह लम्बा नहीं चलेगा। कुछ ही दिनों बाद बारिश शुरू होने के बाद खदानों में पानी भरने से काम फिर बंद हो जाएगा। माना जा रहा है कि अधिकतम एक माह तक खनन हो सकेगा।

यह मिलता है खनिज
भीलवाड़ा जिले में करीब दो हजार खनन पट्टे हैं। इसमें 1200 सेंडस्टोन क्वारी लाइसेंस हैं। लेड, जिंक, सिल्वर, मेसनरी स्टोन, आयरन, ग्रेनाइट, मार्बल, सोपस्टोन की भी खदानें हैं। बिजौलियां क्षेत्र में सेंडस्टोन के क्वारी लाइसेंस हैं। आसींद, मांडल, सहाड़ा में क्वाट्र्ज, फेल्सपार, ग्रेनाइट निकलता है। सहाड़ा, आमली, बागोर क्षेत्र की फैक्ट्रियों में क्वाट्र्ज, फेल्सपार को पीसकर मोरवी (गुजरात) भेजा जाता है। मोरवी में इनकी टाइल्स बनती हैं। हिंदुस्तान जिंक आगूंचा माइंस में लेड जिंक व सिल्वर का खनन शुरू हो गया। जिले से सालाना करीब 1200 करोड़ रॉयल्टी सरकार को मिलती है। जिंदल सॉ लिमिटेड की खदानों में भी लोह का खनन शुरू हो गया।

30,००० खदानें प्रदेश में
प्रदेश में सेंडस्टोन के तीन बड़े खनन क्षेत्र बिजौलियां, जोधपुर व बालेसर हैं। जोधपुर में करीब 14 हजार व बिजौलियां में 1200 सेंडस्टोन क्वारी लाइसेंस हैं। बिजौलियां की खदानों से सरकार को 40 से 45 करोड़ रुपए राजस्व मिलता है।

राजस्थान में फेल्सपार की स्थिति
प्रदेश में करीब ५००० फेल्सपार ग्राइंडिग प्लांट हैं। ये प्लांट ब्यावर, नसीराबाद, किशनगढ़, राजसमंद, आमेट, गंगापुर, नीमका थाना, पावटा, सीकर, उदयपुर व पाली में हैं। यहां से फेल्सपार पाउडर मोरवी जाता है, जहां टाइल्स बनती हैं। भीलवाड़ा जिले में 250 ग्राइंडिंग प्लांट हैं।

सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क जरूरी
खान विभाग ने खदानों के संचालन से पूर्व सोशल डिस्टेंसिंग की पालना व मास्क लगाने के निर्देश दिए हैं। खदान में आते-जाते समय सेनेटाइज होना जरूरी है। गाइडलाइन की पालना नहीं करने पर खनन पट्टा निरस्त किया जा सकता है।
- आसिफ मोहम्मद अंसारी, खनि अभियंता, भीलवाड़ा

फैक्ट्रियां चलाने का मतलब नहीं
खनन से जुड़ी फैक्ट्रियां चलाने की स्वीकृति मिल गई है। अभी गुजरात के मोरवी में इंडस्ट्री चालू नहीं हुई। ऐसे में जब तक माल की मांग नहीं होगी, उद्योग चलाने का मतलब नहीं है।
- मानवेंद्र कुमावत, सचिव, भीलवाड़ा माइंस व पर्यावरण सुधार समिति

आ रही कुछ समस्याएं
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासियों के कारण उद्योग शुरू नहीं हो पाए हैं। कुछ जगह काम चल रहा है, लेकिन गति नहीं आई है। अभी प्रोजेक्ट भी नहीं चलने से मांग भी कम है।
- अनिल सोनी, अध्यक्ष, भीलवाड़ा माइंस ऑनर एसोसिएशन

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