दहशत के साए में कलेजे के टुकड़ों को पढ़ाई के लिए भेजने को मजबूर ग्रामीण

हर दम जी रहे मौत के साये में ग्रामीण

By: neha soni

Published: 07 Jul 2019, 03:21 PM IST

जयपुर / बूंदी
कलेजे के टुकड़े को डर के साये में भेज रहे उच्च अध्ययन को प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के चलते नही हुआ क्रमोन्नत सीसोला पंचायत के सुवांसडा गांव का प्राथमिक विद्यालय का मामला जजावर।


एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं जैसी महत्ती योजना चला रही है।वही सीसोला पंचायत का सुंवासड़ा गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय क्रमोन्नत होने की बाट आज भी जोह रहा है। पिछले काफी सालों से यहाँ के ग्रामीणों ने क्रमोन्नति की मांग कर रखी हैं।लेकिन शासन प्रशासन किसी ने भी सुनाई नही की।यहाँ के ग्रामीणों को अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

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हर दम जी रहे मौत के साये में

ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता राष्ट्रीय राजमार्ग 148 डी पर अपने कलेजे के टुकड़े के दुर्घटनाग्रस्त होने की रहती है।इसका प्रमुख कारण उच्च प्राथमिक विद्यालय नही होने से उच्च अध्ययन के लिए इसी हाईवे से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया की हम हर दम मौत के साये में जी रहे है। गांव से जजावर विद्यालय 4 किलोमीटर की दूरी पर पड़ रहा है। वही दूसरी ओर सीसोला विद्यालय भी 5 किलोमीटर दूर स्थित है। दोनों विद्यालय में पहुँचने के लिए एकमात्र विकल्प राष्ट्रीय राजमार्ग 148 डी पर होकर गुजरना पड़ता है।

ऐसे में रोजाना बच्चों को छोड़ने के लिए साथ मे जाना पड़ता है।क्योंकि अकेला छोड़ने हाईवे पर यातायात के साधनों से दुर्घटनाग्रस्त होने का लगातार खतरा बना रहता है।ऐसे में रोजाना काम धंधे को छोड़कर बच्चों को नियमित छोड़ना पड़ रहा है।यदि किसी दिन साथ नही गए तो पूरे दिन डर बना रहता है कि मेरा कलेजा का टुकड़ा सलामत है या नही।घर आने पर ही सांस में सांस आती है।

 

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नियमों को रख दिया ताक पर
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक विद्यालय को उच्च प्राथमिक विद्यालय में क्रमोन्नत के लिए कुछ मापदण्ड बने हैं। जिसके अनुसार 60 से अधिक नामांकन होना चाहिए। दूसरा उच्च विद्यालय की दूरी 2 किलोमीटर से अधिक होना चाहिए। जबकि सुंवासड़ा का ये प्राथमिक विद्यालय सभी मापदंडों को पूरा कर रहा है। यहां नामांकन भी पिछले कई सालों से तय मापदंड से ज्यादा है तो उच्च शिक्षा के लिए विद्यालय की दूरी भी लगभग दुगनी से ज्यादा है। यह विद्यालय की भौतिक सुख सुविधा से भी परिपूर्ण है। ऐसे में ये विद्यालय प्रशासनिक अधिकारी की उदासीनता के चलते क्रमोन्नत नही हो पाया है।

 

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ये नामांकन है की स्थिति
सीसोला पंचायत के सुंवासड़ा का राजकीय प्राथमिक विद्यालय 1984 में स्थापित हुआ।आंकड़ो की बात की जाए तो पिछले तीन सालों में नामांकन की स्थिति इस प्रकार रही हैं सत्र 2019- 20 में कुल नामांकन 70,सत्र 2018- 19 में कुल नामांकन 66 व सत्र 2017- 18में कुल नामांकन 64 छात्र छात्राओं का नामांकन रहा।पूर्व उपसरपंच शिवनारायण गुर्जर ने बताया कि विद्यालय क्रमोन्नत के लिए शासन प्रशासन सब को पहले भी अवगत कराया जा चुका है।लेकिन हमारी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। अब तो शायद किसी दिन बड़ी दुर्घटना घटित होने के बाद ही विभाग के अधिकारी चेतेंगे।

'हाईवे पर होकर गुजरना बच्चों के लिए खतरे की बात है । इस समस्या को देखते हुए जल्द प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालय में क्रमोन्नत के प्रस्ताव निदेशक को भिजवा दिए जाएंगे।
रामकृष्ण मीणा ,मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी बूंदी

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