नागरिकता कानून पर हाईकोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान...पूछी प्रक्रिया

नागरिकता संशोधन अधिनियम ( Citizenship Amendment Act ) लागू होने के बाद नए प्रावधानों ( New Provisions ) के तहत पड़ोसी देशों के उत्पीडि़त अल्पसंख्यकों को नागरिकता दिए जाने के संबंध ( Process Of Citizenship ) में उठाए जाने वाले कदमों का राजस्थान हाईकोर्ट ( Rajasthan High Court ) ने केंद्र सरकार ( Central Government ) से चार सप्ताह में ब्योरा देने के लिए कहा है। ( Jaipur News )

By: sanjay kaushik

Published: 03 Jan 2020, 02:09 AM IST

-हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा...कैसे दी जाएगी पड़ोसी देशों के उत्पीडि़तों को नागरिकता

-अदालत ने चार सप्ताह में मांगा ब्योरा

-स्वप्रसंज्ञान पर जनहित याचिका दर्ज

जोधपुर। नागरिकता संशोधन अधिनियम ( Citizenship Amendment Act ) लागू होने के बाद नए प्रावधानों ( New provisions ) के तहत पड़ोसी देशों के उत्पीडि़त अल्पसंख्यकों को नागरिकता दिए जाने के संबंध ( process Of Citizenship ) में उठाए जाने वाले कदमों का राजस्थान हाईकोर्ट ( Rajasthan High Court ) ने केंद्र सरकार ( Central Government ) से चार सप्ताह में ब्योरा देने के लिए कहा है। ( Jaipur News ) मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी।

-केंद्र को ये होगा बताना

केंद्र सरकार को यह बताना होगा कि नए प्रावधानों के तहत नागरिकता दिए जाने के अधिकार किस प्राधिकारी में निहित रहेंगे और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

-न्याय मित्र ने कोर्ट को कराया अवगत

न्यायाधीश विजय बिश्नोई और न्यायाधीश मनोजकुमार गर्ग की खंडपीठ में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्याय मित्र सज्जनसिंह राठौड़ ने नागरिकता अधिनियम में हाल ही हुए संशोधन के बारे में कोर्ट को अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि अधिनियम में संशोधन के बाद यह प्रावधान किया गया है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय का कोई भी व्यक्ति, जिसने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया था और जिन्हें पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत या फोरेनर्स एक्ट-1946 के प्रावधानों या इसके अधीन कोई नियम या आदेश से छूट दी गई है, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा। खंडपीठ ने 6 (बी) के नए प्रावधान भी देखे, जिसके अनुसार विनिर्दिष्ट शर्तों के तहत अब नागरिकता देने का अधिकार केंद्र सरकार या एक प्राधिकारी में निहित होगा।

-केंद्र के वकील ने जवाब के लिए मांगा समय

कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता विपुल सिंघवी से संशोधन के बाद लागू प्रावधानों के अनुसरण में पड़ोसी देशों के उत्पीडि़त अल्पसंख्यकों को नागकिरता देने के संबंध में किए जा रहे प्रयासों का विवरण पूछा। इस पर उन्होंने अपेक्षित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई 3 फरवरी नियत करते हुए केंद्र सरकार को अपेक्षित ब्यौरा देने को कहा है। पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि जिला कलेक्टर को नागरिकता देने का अधिकार विकेंद्रीकृ त करने के बाद जोधपुर जिले में अक्टूबर, 2019 तक 1365 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी थी।

sanjay kaushik Incharge
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