पंचायत चुनावः बगावत पर उतरे कैबिनेट मंत्री के भाई, पार्टी की बढ़ी टेंशन

मंत्री सालेह मोहम्मद के चार भाई लड़ रहे बागी होकर चुनाव, पार्टी पर लगाया अनदेखी करने का आरोप, अमरदीन फकीर युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और पिराने फकीर युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हैं

By: firoz shaifi

Updated: 13 Nov 2020, 10:31 AM IST

जयपुर। जिला परिषद और पंचायत चुनाव में प्रदेश कांग्रेस की ओर से भले ही एकजुटता होने और बगावत नहीं होने के लाख दावे किए जा रहे हों, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। जिला परिषद और पंचायत चुनाव में टिकट वितरण के बाद कई जिलों में कांग्रेस से बगावत कर नेताओं ने बागी प्रत्याशियों के रूप में चुनाव मैदान में ताल ठोककर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।

ऐसा ही एक जिला जैसलमेर भी हैं जहां कांग्रेस के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के चार भाई टिकट वितरण में अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी से बागी होकर चुनाव मैदान में कूद गए हैं।

जैसलमेर में कांग्रेस की राजनीति गाजी फकीर परिवार के ईद-गिर्द ही रहती है ऐसे में यहां मंत्री के चार भाईयों की बगावत से कांग्रेस में उथल पुथल मची हुई है। हालांकि मंत्री के और भाई व पूर्व जिला प्रमुख अब्दुल्ला फकीर पार्टी के टिकट पर जिला परिषद का चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और बागी प्रत्याशी अमरदीन फकीर की पत्नी भी कांग्रेस के टिकट पर जिला परिषद का चुनाव लड़ रही हैं।

दो भाई हैं युवा कांग्रेस में पदाधिकारी
पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में कूदे कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के चार भाईयों में से दो भाई युवा कांग्रेस में पदाधिकारी हैं, इनमें पूर्व प्रधान अमरदीन फकीर युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं तो दूसरे भाई पिराने फकीर वर्तमान में यूथ कांग्रेस के जैसलमेर जिलाध्यक्ष हैं। अमरदीन सम पंचायत समिति से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।


इनके अलावा मंत्री सालेह मोहम्मद के 2 और छोटे भाई भी चुनाव मैदान में डटे हैं। इनमें इलियास फकीर जैसलमेर पंचायत समिति से मैदान में है। तो वहीं एक और भाई अमीन फकीर की पत्नी भी जैसलमेर पंचायत समिति से निर्दलीय चुनाव मैदान में डटी हैं।

प्रदेश कांग्रेस तक पहुंची रिपोर्ट
वहीं गहलोत सरकार के कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के चार भाईयों और परिवार अन्य सदस्यों की ओर से बागी होकर चुनाव मैदान में डटे रहने की शिकायत प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय तक भी पहुंची हैं, लेकिन फिलहाल बागियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधी जा रही है। वहीं मंत्री के भाईयों के चुनाव मैदान में डटने से कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने मुश्किलें खड़ी होती नजर आ रही है।

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