scriptCaesareans increased by 45 percent in Rajasthan's government hospital | Rajasthan : राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 45 प्रतिशत बढ़ गए सीजेरियन | Patrika News

Rajasthan : राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 45 प्रतिशत बढ़ गए सीजेरियन

पिछले चार साल के दौरान सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में साल दर साल प्रसव में कमी आई है। वहीं सीजेरियन से प्रसव के केस में खासा इजाफा हुआ है।सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2018-19 की तुलना में वर्ष 2021-22 में जहां प्रसव में करीब 5 फीसदी की कमी आई । वहीं सीजेरियन करीब 45 फीसदी बढ़े हैं।

जयपुर

Published: May 11, 2022 05:03:04 pm

भीलवाड़ा. जिले में पिछले चार साल के दौरान सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में साल दर साल प्रसव में कमी आई है। वहीं सीजेरियन से प्रसव के केस में खासा इजाफा हुआ है।सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2018-19 की तुलना में वर्ष 2021-22 में जहां प्रसव में करीब 5 फीसदी की कमी आई । वहीं सीजेरियन करीब 45 फीसदी बढ़े हैं।
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चिकित्सक प्रसव में कमी का कारण लोगों में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ना बता रहे हैं। सीजेरियन बढ़ने का कारण अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक और चिकित्सा सुविधाएं बढऩे के साथ ही लोगों में जोखिम नहीं लेना बता रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी यहीं चलन देखने को मिल रहा है।
चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 40,511 प्रसव हुए। इसमें 2,970 सीजेरियन हुए। 2021-22 की अवधि में प्रसव का आंकड़ा चार साल पहले की तुलना में पांच फीसदी घटकर 38,405 रह गया, जबकि सीजेरियन करीब 45 फीसदी बढ़कर 4,299 हो गए।
जागरूकता से घटी जन्मदर

चिकित्सकों के अनुसार अब युगल एक या दो संतान ही चाह रहे हैं। उनमें परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिलाएं कई तरह के परिवार नियोजन के साधन अपना रही है। भीलवाड़ा परिवार नियोजन के मामले में वर्ष 2020-21 में राजस्थान में तीसरे स्थान पर रहा।
जांचों से जटिलताएं सामने आई

चिकित्सकों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव पूर्व जांच की सुविधाएं मिलने से गर्भवती को हो रही जटिलताओं का पता चल जाता है। प्रसव में किसी तरह की कठिनाई और रिस्क होने पर चिकित्सक परिजनों को इस बारे में बता देते हैं। ऐसे में परिजन भी जज्जा और बच्चा के लिए जोखिम नहीं लेते और तुरन्त सीजेरियन के लिए सहमति दे देते हैं।
सुविधाएं सुधरी है...

अब पूरे जिले में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हुई है। ग्रामीण इलाकों में स्त्री रोग विशेषज्ञ होने से जोखिम होने पर सीजेरियन कर दिया जाता है। लोगों ने अब रिस्क लेना कम कर दिया है। परिवार नियोजन के प्रति लोगों में जागरूकता आई है।
- डॉ. संजीव शर्मा, जिला शिशु और प्रजनन अधिकारी, भीलवाड़ा

पूर्व जांच में जटिलता का पता चल जाता है...

जिला चिकित्सालय में प्रसव और सीजेरियन दोनों मामले बढ़े है। गांवों से जटिल केस आने पर जिला अस्पताल में सीजेरियन करना पड़ता है। प्रसव पूर्व जांच होने से जटिलताएं और रिस्क भी पता चल जाती है। ऐसे में परिजन प्रसव के समय किसी तरह का जोखिम लेना नहीं चाहते।
- डॉ. मुकेश सुवालका, स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ, राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल भीलवाड़ा

मेडिकल कॉलेज खुला, गांवों में चिकित्सकों की नियुक्ति
भीलवाड़ा में वर्ष 2018 में मेडिकल कॉलेज शुरू हो गया। यहां जिला मुख्यालय पर राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं और चिकित्सकीय सुविधाओं में खासा इजाफा हुआ। ऐसे में जिला अस्पताल में प्रसव के मामले बढ़ गए। दो साल में कोरोना के कारण राज्य सरकार ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी चिकित्सक और सुविधाओं में बढ़ोतरी की। इसका भी असर प्रसव और सीजेरियन पर पड़ा है।
सरकारी अस्पतालों में हुए प्रसव

वर्ष कुल प्रसव सीजेरियन

2018-19 40,511 2,970

2019-20 41,894 3,774

2020-21 40,485 4,179

2021-22 38,405 4,299

निजी अस्पतालों में हुए प्रसव

वर्ष कुल प्रसव सीजेरियन
2018-19 5,233 355

2019-20 4,678 877

2020-21 4,134 610

2021-22 4,125 748

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी राजस्थान पत्रिका में राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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