वाहवाही पाने की जल्दबाजी में लगी 500 करोड़ की चपत, अब कैग ने उठाए सवाल

वाहवाही पाने की जल्दबाजी में लगी 500 करोड़ की चपत, अब कैग ने उठाए सवाल

Mridula Sharma | Publish: Sep, 10 2018 10:07:55 AM (IST) | Updated: Sep, 10 2018 10:13:51 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर मेट्रो: मानसरोवर से चांदपोल तक मेट्रो रूट के चयन पर कैग ने उठाए सवाल

जयपुर. राजधानी में मेट्रो परियोजना के जरिए वाहवाही पाने की जल्दबाजी सरकारी खजाने को 500 करोड़ का फटका लगा गई। यात्रीभार को आधार बनाने की बजाय गलत रूट चुनकर मेट्रो चलाने के कारण राज्य के खजाने को यह चपत लगी है। जबकि नगरीय विकास विभाग के तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव ने मानसरोवर से चांदपोल तक मेट्रो फेज 1-ए अव्यावहारिक होने की आशंका जता दी थी। जिस अनुमानित यात्रीभार को आधार बनाकर मेट्रो के पिलर खड़े किए, उस अनुमान को तब ही अव्यावहारिक बता दिया गया था।

सार्वजनिक व निजी परिवहन के यात्रियों को जोड़ लिया जाए तो भी 25 से 30 हजार यात्री से ज्यादा नहीं मिल पाने की आशंका जताई गई थी। जबकि डीपीआर में 1.21 लाख यात्री प्रतिदिन बताए गए। मौजूदा यात्रीभार और किराया राशि से यह आंशका सही ही साबित हुई है। अब कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ तो सरकार से नौकरशाह तक सभी संबंधित अफसर कठघरे में आ गए हैं। तत्कालीन सरकार ने डीपीआर में हर दिन अनुमानित 2.1 लाख यात्रीभार फेज 1-ए व 1-बी होने का दावा कर करोड़ों का प्रोजेक्ट खड़ा कर दिया। हकीकत यह है कि वर्तमान में यह 22 हजार पर आ गिरा है।

मेट्रो ट्रेन में लगातार यात्रीभार घटने से लेकर मनमाने खर्च के चलते घाटा भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसीलिए सरकार और मेट्रो प्रशासन की सांस फूलती जा रही है। हालांकि पिलर पर विज्ञापन, स्टेशन हिस्से के प्रमोशन से लेकर कई जतन किए गए लेकिन इसके बावजूद घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि हर साल 12 प्रतिशत की दर से शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। शहरवासियों को आज भी जाम, प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं से जूझना पड़ रहा है।

 

फैक्ट फाइल
19.17 फीसदी यात्री ही मिले जून 2015 से मार्च 2017 तक
164 करोड़ रुपए किराया राशि मिलने का दावा किया,लेकिन 16.19 करोड़ रुपए ही आए झोली में
147.81 करोड़ रुपए का अनुमानित नुकसान हुआ

 

ऐसे हुआ नुकसान
147.81 करोड़ रुपए : अनुमानित यात्रीभार नहीं मिलने से नुकसान
85.56 करोड़ रुपए : मेट्रो संचालन पर खर्च
1.36 करोड : भवन किराए पर अधिक खर्च
22.54 करोड़ रुपए : दोमंजिला भूमिगत पार्किंग
0.60 करोड़ रुपए : प्रवाही जल उपचार संयंत्र
11.85 करोड़ रुपए : निष्क्रिय कर्मचारियों का भुगतान
32.77 करोड़ रुपए : विद्युत आपूर्ति तंत्र पर अतिरिक्त खर्च
0.33 करोड़ रुपए : रेल सह रोड पर खर्च, जिसका उपयोग नहीं
13.72 करोड़ रुपए : सम्पत्ति विकास से कम आय

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