वसुंधरा सरकार के रोज़गार देने के दावों की खुली पोल! CAG रिपोर्ट में 'झूठे' आंकड़ों ने उठाए गंभीर सवाल

वसुंधरा सरकार के रोज़गार देने के दावों की खुली पोल! CAG रिपोर्ट में 'झूठे' आंकड़ों ने उठाए गंभीर सवाल

Nakul Devarshi | Publish: Sep, 06 2018 11:18:02 AM (IST) | Updated: Sep, 06 2018 11:26:36 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर।

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के कौशल विकास योजना के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार देने के सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। विधानसभा में बुधवार को पेश हुई नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा गया है कि आरएसएलडीसी की रिपोर्ट में नियोजन सम्बंधी आंकड़े एक सीमा तक गलत हैं।

 

इसमें प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं में से 35.58 का नियोजन बताया गया जबकि वास्तविक सत्यापन में बताए गए आंकड़े में से 37.45 प्रतिशत ही सही मिले। यह खुलासा सामान्य एवं सामाजिक क्षेत्र की रिपोर्ट में किया गया है।

 

कौशल विकास को लेकर पेश रिपोर्ट में कहा है कि प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षणार्थी को रोजगार मिलने की स्थिति की समीक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था ही नहीं की गई। राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (आरएसएलडीसी) के 3 प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं। नियमित कौशल व रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में न्यूनतम 50 प्रतिशत, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना में 70 प्रतिशत रोजागर उपलब्ध कराना था।


प्रशिक्षण का लक्ष्य अधूरा
मानव संसाधन को कुशल करने के लिए 12 प्रमुख क्षेत्र छांटे गए थे। इनमें निर्माण, टैक्सटाइल, स्वास्थ्य-देखभाल, ऑटोमैकेनिक जैसे क्षेत्र शामिल थे। ग्रामीण कौशल योजना में इस क्षेत्र में 73.67 प्रतिशत प्रशिक्षण का लक्ष्य पूरा किया गया। पहली योजना में 14.19 तथा दूसरी में 55.78 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा किया गया। दीनदयाल उपाध्याय योजना में 70 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करने की कठोर शर्त के कारण ऐसा हुआ।


रोजगार का लक्ष्य भी पूरा नहीं
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रशिक्षण के बाद कितनों को रोजगार मिला, इसके सत्यापन की उचित व्यवस्था नहीं है। नियोजन सत्यापन प्रकोष्ठ के पास 2 योजनाओं में किए गए नियोजन का सत्यापन ही उपलब्ध नहीं था। मात्र रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। इसमें 1 लाख 27 हजार 817 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं ने 42 हजार 758 को रोजगार देना बताया। दूरभाष से सत्यापन करने पर यह संख्या 26 हजार 444 ही मिली। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वास्तविक सत्यापन करने पर इनकी संख्या भी मात्र 9 हजार 904 रह गई।

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