अगले सप्ताह से शुरू होगा सड़क चौराहों को भिक्षावृत्ति मुक्त करवाने का अभियान


प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की जरूरत

By: Rakhi Hajela

Updated: 12 Jul 2021, 07:28 PM IST



जयपुर, 12 जुलाई
राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Rajasthan State Commission for Protection of Child Rights) की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल का कहना है कि अगले सप्ताह से जयपुर की सड़कों और चौराहों को भिक्षावृत्ति मुक्त करवाने का अभियान शुरू किया जाएगा। सोमवार को बेनीवाल की अध्यक्षता में पुलिस, श्रम, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति और स्वंय सेवी संस्थाओं की बैठक (Meeting of Police, Labor, Social Justice and Empowerment, Department of Child Empowerment, Child Welfare Committee and voluntary organizations) में उनका कहना है कि बच्चे हमारा भविष्य हैं, इसलिए उन्हें बाल मजदूरी और भिक्षावृत्ति के दलदल से मुक्त करवाना जरूरी है जिससे बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस के मौके पर आयोजित वेबिनार में मुख्यमंत्री ने प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने का विजन सभी से साझा किया था। आयोग ने पहल करते हुए इस पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन यह तभी संभव होगा जबकि हम सभी साथ मिलकर कार्य करेंगे। अन्य राज्यों से आने वाले बाल मजदूरों को लिए राजस्थान डेस्टिनेशन बन गया है। दक्षिणी राजस्थान से बच्चे कपास, बीटी कॉटन आदि कार्यों के लिए पलायन करते हैं। इसके लिए हमें अत्यंत जागरुक और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
सूचना तंत्र मजबूत करने की आवश्यकता
इस दौरान श्रम विभाग के शासन सचिव नीरज के पवन ने कहा कि शहरों को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए भिखारियों को कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़कर रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक समस्या का समाधान हो सकेगा और भिक्षावृत्ति उन्मूलन में मदद मिलेगी। वहीं बाल अधिकारिता विभाग के आयुक्त महेश शर्मा ने ग्रामीण स्तर पर सूचना तंत्र को और अधिक मजबूत करने और जागरुकता बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही शर्मा ने हर महीने सभी संबंधित विभागों के साथ संवाद कार्यक्रम करने का सुझाव दिया।
बाल पुलिस थाना भी स्थापित करने का सुझाव
पुलिस उपायुक्त अमृता दुहान का कहना है कि हमें तीन फेज में योजना बनाकर कार्य करना होगा, जिसमें पहले चरण में शॉर्ट टर्म में तुरंत भिखारियों को चिन्हित कर उनका पुनर्वास किया जाए। साथी ही मिड टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीति भी बनाई जाए। पुलिस अधीक्षक मानव तस्करी विरोधी इकाई कल्याणमल मीणा ने कहा कि बाल श्रमिकों को स्रोत राज्यों से समन्वय स्थापित किया जाए। बैठक में महिला थाने की तर्ज पर बाल पुलिस थाना भी स्थापित किए जाने का सुझाव भी दिया गया।

Rakhi Hajela Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned