परीक्षार्थियों ने उठाई मांग, किया जाए प्रमोट

उच्च शिक्षा की परीक्षाओं को लेकर फैसला जल्द
फैसले से पहले प्रदेश के परीक्षार्थियों ने उठाई मांग
परीक्षाओं को रद्द करते हुए प्रमोट करने की मांग
कहा, दूसरी लहर ने युवाओं को सबसे ज्यादा लिया चपेट में
20 लाख परीक्षार्थियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखे सरकार

By: Rakhi Hajela

Published: 09 Jun 2021, 08:36 PM IST



जयपुर, 9 जून
प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को लेकर गठित कमेटी की रिपोर्ट गुरुवार को आने की संभावना है लेकिन इससे पहले विद्यार्थियों ने परीक्षाओं को रद्द करते हुए उन्हें प्रमोट किए जाने की मांग की है। इन विद्यार्थियों का कहना है कि प्रदेश के 20 लाख विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार अपना फैसला ले। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में युवाओं का अभी तक वैक्सीनेशन तक नहीं हो पाया है। ऐसे में कोविड का खतरा लगातार बरकरार है। यदि सरकार परीक्षा का आयोजन करना ही चाहती है तो ऑनलाइन मोड में करें अथवा बिना परीक्षा प्रमोट किया जाए।
एनएसयूआई ने भी मांग
एनएसयूआई के प्रदेश प्रवक्ता रमेश भाटी का कहना है कि अगर परीक्षाएं होती हैं तो बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों को सबसे अधिक परेशानी होगी। अभी परिवहन सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी हैं और तो और छात्रावास भी बंद हैं। इतना ही नहीं इस बार पढ़ाई की बात की जाए तो वह मात्र दो माह ही हो पाई है। ऐसे में सरकार जो भी फैसला ले वह सोच समझ कर लें।
विवि की छात्रा शैली शर्मा का कहना है कि कॉलेज हो या स्कूल ऐसा परिसर है जहां अगर एक भी विद्यार्थी को कोविड होता है तो अन्य विद्यार्थी भी उसकी चपेट में आ सकते हैं। कई विद्यार्थी जो बाहर रहते हैं यदि वह ट्रेवल करके आते भी हैं तो यात्रा के दौरान भी वह खुद भी कोविड पॉजिटिव हो सकते हैं और दूसरों को भी संक्रमण दे सकते हैं। ऐसे में बेहतर है कि ओपन बुक परीक्षा ली जाएं।

कॉलेज छात्र विजयपाल का कहना है कि जब सरकार 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द की जा सकती है तो कॉलेज की क्यों नहीं। सरकार को प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं रद्द करनी चाहिए, जहां तक फाइनल ईयर की परीक्षा है उसे ओपन बुक के जरिए करवाई जा सकती है। सरकार खुद अपनी बैठक वर्चुअल कर रही है तो विद्यार्थियों को परीक्षाकेंद्रों पर बुलाकर भीड़ एकत्र करने का कोई मतलब नहीं है।

वहीं अम्बिका का कहना है कि प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षा रद्द करनी चाहिए। ऑफलाइन परीक्षा करवाने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। अगर सरकार परीक्षा का ऑफलाइन करवाती है तो इसका खामियाजा स्टूडेंट्स को भुगतना होगा।

Rakhi Hajela Desk
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