किसानों के नाम से पूंजीपति उठाएंगे फायदा, केंद्र के अध्यादेश किसान विरोधी – रामपाल जाट

“कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश, 2020” और “मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) समझौता अध्यादेश,2020” का विरोध शुरू हो गया है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री से पत्र प्रेषित कर अध्यादेशों वापस लेने का आग्रह किया है।

By: Umesh Sharma

Published: 14 Jun 2020, 02:27 PM IST

जयपुर।

“कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश, 2020” और “मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) समझौता अध्यादेश,2020” का विरोध शुरू हो गया है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने प्रधानमंत्री से पत्र प्रेषित कर अध्यादेशों वापस लेने का आग्रह किया है।

जाट ने बताया कि इन अध्यादेशों को लाने का केंद्र सरकार का मंतव्य सही नहीं है। सरकार कह रही है कि अध्यादेशों से किसानों को अपनी उपज देशभर में बेचने की छूट मिलेगी। कृषि उपज के विक्रय पर किसानों को किसी भी प्रकार के कर, उपकर या शुल्क नहीं देने पड़ेंगे। जबकि सही तथ्य यह है कि सरकार ने बड़ी पूंजी वालों को राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों की परिधि से बाहर कर दिया है। उन्हें सभी प्रकार के कर, उपकर एवं शुल्कों से मुक्ति दे दी है। इसी प्रकार उनको सम्पूर्ण देश में कृषि उपजों के क्रय-विक्रय करने पर छूट मिल गई है। इतना ही नहीं संग्रहण सीमा को समाप्त करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रावधान कर दिए। उन्हें कृषि उपजों के असीमित भंडारण के लिए सुविधा प्रदान कर दी। इन सब प्रावधानों से कृषि उपज के व्यापार को हथियाने के लिए बड़ी पूंजी वालों को अवसर मिल गया है।

उन्होंने कहा कि किसानों को गारंटीड मूल्य की चर्चा कर उचित मूल्य प्राप्ति का आश्वासन देने का प्रचार किया जा रहा है, जबकि इन कानूनों में गारंटीड मूल्य एवं उचित मूल्य प्राप्ति के आश्वासन के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इसी तरह देश में 86.6 प्रतिशत किसानों की जोत का आकार 2 हैक्टेयर से कम है, वहीं देश की जोत का औसत आकार 1.15 हैक्टेयर है। इन परिस्थितियों में देश में विकेंद्रीकृत व्यवस्था अधिक कारगर है।

Umesh Sharma Reporting
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