एक माह में 1400 रुपए प्रति किलो महंगी हुई ये चीज, भाव 2700 रुपए पार, लोगों की पहुंच से हुई बहुत दूर

बारिश की कमी के चलते पौधों को भारी नुकसान हुआ है...

जयपुर।

उत्पादन केन्द्रों पर पैदावार कम होने से इन दिनों छोटी इलायची के भाव आसमान छू रहे हैं। थोक में 1300 रुपए प्रति किलो बिकने वाली इलायची के भाव एक माह के अंतराल में 2700 रु पए प्रति किलो तक हो गए हैं। जयपुर मंडी में छोटी इलायची आठ एमएम का भाव तो 3000 रुपए प्रति किलो पहुंच गया है। रिटेल में इलायची 3500 रुपए किलो यानी 35 रुपए प्रति ग्राम से ऊपर बिकने लगी है। जानकारों के मुताबिक केरल मे बारिश की कमी के चलते इलायची के पौधों को भारी नुकसान हुआ है। उधर ग्वाटेमाला में भी इलायची का स्टॉक 50 फीसदी बताया जा रहा है, जिससे निर्यातक हर भाव पर लिवाल बने हुए हैं। कारोबारी रामअवतार बजाज ने बताया कि पिछले साल जुलाई-अगस्त के दौरान केरल में पहले भारी बारिश होने और इसके बाद आई विनासकारी बाढ़ के कारण छोटी इलायची की फसल को व्यापक नुकसान हुआ था। इस कारण इसकी उपलब्धता में कमी आई है। नई इलायची की आवक में अभी तीन-चार महीने का समय शेष है, जबकि स्टॉक 20 फीसदी ही रह गया है। लिहाजा छोटी इलायची में फसल के पहले मंदी के आसार नहीं हैं।

 

सरस घी 10 रुपए लीटर महंगा
राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन ने सरस घी के कंज्यूमर पैक में 10 रुपए लीटर और 15 किलो टिन पैक में 20 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई दरें शुक्रवार से लागू होंगी। 1 लीटर पैक 375 की जगह 385 रुपए में मिलेगा। 5 लीटर टिन पैक 1875 की जगह 1925 में मिलेगा। 15 किलो टीन पैक 5550 रुपए की बजाय 5850 रुपए मेे मिलेगा।

एमएसपी से कम दामों पर सरसों नहीं बेचेगी नाफेड
नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग फैडरेशन ऑफ इंडिया (नाफेड) इस साल देश में करीब 17 लाख टन सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। यह एजेंसी देश में अभी तक लगभग 4.50 लाख टन सरसों की खरीद एमएसपी पर कर चुकी है। वर्तमान में सरसों का एमएसपी 4200 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि मंडियों में सरसों के भाव 3400 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहे हैं। नाफेड के एमडी संजीव कुमार चढ्ढा ने बताया कि सरसों की खरीद जून के अंत तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को डरने की जरूरत नहीं है। चुनावों के कारण खरीद में थोड़ा विलंब अवश्य हुआ है, लेकिन अब खरीद की रफ्तार बढ़ा दी गई है। एमडी ने कहा कि सिर्फ नाफेड ही सरसों की खरीद कर रही है, इसके लिए स्टेट एजेंसियों को भी सामने आना चाहिए, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। गौरतलब है कि इस समय स्टॉकिस्ट भी सरसों की खरीदारी से दूरी बनाए हुए है। इस कारण भी सरसों के भाव नहीं बढ़ पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं नाफेड एमएसपी से नीचे सरसों की बिकवाली नहीं कर दे। चढ्ढा ने कहा कि हम एमएसपी से कम भाव पर सरसों नहीं बेचेंगे। नाफेड तो फायदे से ही सरसों की बिकवाली करना चाहेगी।

dinesh Desk
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