जन सहयोग से कर रहें है गायो की देखभाल

जन सहयोग से कर रहें है गायो की देखभाल

Priyanka Yadav | Publish: Mar, 14 2018 12:24:17 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

एक कॉल पर ले आते बीमार और घायल गौवंश

जयपुर . बीमार व दुर्घटनाग्रस्त गायों की एक तरफ मरहम-पट्टी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्वस्थ हो चुके गोवंश की देखरेख व चारे-पानी की व्यवस्था में लोग जुटे हुए हैं। यह नजारा है सांगानेर के निकट ग्राम जोतड़ावाला स्थित संत परमसुखदास गोशाला का, जो दानदाताओं के भरोसे चल रही है। गोशाला में 1500 से अधिक गोवंश मौजूद है।

इनमें से अधिकतर गाय और बछड़े बीमार अथवा दुर्घटनाग्रस्त हालात में यहां लाए जाते हैं। यहां जयपुर के अलावा जयपुर ग्रामीण, अजमेर , अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर और सीकर सहित 500 से अधिक गांवों से गोवंश लाए जाते हैं। करीब आठ बीघा में फैली गोशाला के गोवंश की देखभाल के लिए 50 ग्वाले (महिला-पुरुष) है। इसके अलावा छह पशु चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। गोशाला में 20 से अधिक गाय और सांड अंधे भी हैं। यहां बांझ गायें भी बड़ी मात्रा में हैं।

यहां दें सूचना

गोवंश को लाने के लिए 24 घंटे मुफ्त एम्बुलेंस सेवा है। मोबाइल 9001355715 पर सूचना मिलते ही चिकित्सकों के साथ टीम मौके पर पहुंचकर गोवंश को ले आती है।

26 वर्ष पूर्व यूं हुई शुरूआत

26 वर्ष पूर्व संत रामकरणदास गुरु संत परमसुखदास के साथ निवाई जा रहे थे। इसी दौरान चाकसू में अज्ञात वाहन की टक्कर से छह गाय सड़क पर घायल दिखी। तब उन्होंने जेब में मौजूद सारे रुपए एक ऊंटगाड़ी चालक को देकर गायों को लेकर जोतड़ावाला स्थित मंदिर पर लाने को कहा। इनकी देखभाल के लिए श्रीसंत परमसुखदास महाराज आश्रम शिवराम सेवा समिति के तहत गोशाला पंजीकृत है।

आते हैं गौग्रास देने

गोशाला में हर शनिवार करीब दो सौ किलो गौ ग्रास (रोटी व गुड़) आता है। इस दौरान यहां मेले सा माहौल हो जाता है। गोशाला से जुड़े कुछ लोग प्रतापनगर और सीतापुरा में सैकड़ो घरों से गौग्रास एकत्र कर खिलाते हैं।

सरकारी सहायता नहीं

गोशाला अध्यक्ष संत रामकरण दास ने बताया की बीमार, घायल, कमजोर, वृद्ध, बांझ और दुर्घटनाग्रस्त गायों को यहां रखा जाता है। गोशाला को सरकारी आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। सिर्फ दानदाताओं के भरोसे ही 26 वर्षों से संचालित की जा रही है।

 

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