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दम घोंट रही व्हाइट क्ले

बीकानेर/ कोलायत। जिले की कोलायत तहसील क्षेत्र में व्हाइट क्ले की खदानों से उड़ने वाले क...

बीकानेर

Updated: January 16, 2015 12:03:08 pm

बीकानेर/ कोलायत। जिले की कोलायत तहसील क्षेत्र में व्हाइट क्ले की खदानों से उड़ने वाले कण मानव जीवन के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं। यहां के वाशिंदों को इसकी भनक तक नहीं है। खदानों में पत्थरों व मिट्टी के कण मजदूर वर्ग के श्वांस के साथ फेंफड़ों में जम कर श्वांस लेने में तकलीफ व फेंफड़ों को कमजोर कर रहे हैं। व्यक्ति के फेंफड़ों में पत्थरों व मिट्टी के कण काफी समय तक जमने से वह "सिलिकोसिस" बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लंबे समय तक सिलिकोसिस बीमारी की चपेट में रहने वाला व्यक्ति टीबी से ग्रस्त हो जाता है। जिले के कोलायत व गजनेर क्षेत्र में अब तक 750 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं।

कहां अधिक फैलता है
सिलिकोसिस फैलने की आंशका उन क्षेत्रों में अधिक होती है जहां पत्थरों की ड्रिलिंग, पत्थरों में विस्फोट व धूल मिट्टी के कार्य अधिक होते हैं। कोलायत बेल्ट में 80 से अधिक खाने हैं। जिस कारण इस क्षेत्र में सिलिकोसिस पांव पसार रहा है।

प्रदेश में इसका असर
प्रदेश के जालौर, पाली, दौसा, करौली ,श्रीडूंगरपूर, प्रतापगढ, राजसंमद, सिरोही उदयपूर सहित 19 जिलों में सिलिकोसिस रोगी पॉजीटिव मिले है। राज्य सरकार ने इसके लिए सिलिकोसिस निदान व उपचार योजना दो वर्ष पहले शुरू की थी । बीकानेर जिले के कोलायत व गजनेर स्वास्थ केन्द्र पर इसकी जांच नि:शुल्क की जाती है। जांच में अब तक 750 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

गंभीर बीमारी
सिलीकोसिस वन टाइप ऑफ निमोकोनियोफिस बीमारी है। इस बीमारी के पीडित पत्थरों व मिट्ट की खदान क्षेत्रों में सर्वाधिक पाए जाते हैं। पत्थरों व सख्त मिट्टी की खदानों से उड़ने वाले छोटे-छोटे कण श्वांस के साथ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर फेंफड़ों में जम जाते हैं, जिससे व्यक्ति में टीबी होने की सर्वाधिक संभावना रहती है। जिले में सिलिकोसिस से सैकड़ों लोग प्रभावित हैं।
डॉ. बी.बी. माथुर, विभागाध्यक्ष श्वसन रोग विभाग पीबीएम

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