पशुपालकों पर पड़ी है कोरोना की सर्वाधिक मार, 25 प्रतिशत तक कम मिल रहे हैं दाम

जयपुर. कोरोना काल में दूध की खपत घटने की मार पशुपालकों पर पड़ी है। खपत कम होने से उन्हें दूध का बाजिव दाम नहीं मिल पा रहा है। होटल, रेस्तरां, कैंटीन और हलवाई की दुकानों में दूध की खपत घट जाने से कीमतों में गिरावट आई है। लॉकडाउन से पहले पशुपालक जिस भाव पर दूध बेच रहे थे, उसके मुकाबले अब करीब 25 फीसदी कम भाव पर बेचने को मजबूर हैं।

By: Subhash Raj

Published: 29 Jun 2020, 08:43 PM IST

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, जहां रोजाना करीब 50 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है। कोरोना काल में शादी-समारोह व अन्य बड़े आयोजनों पर पाबंदी होने और होटल, रेस्तरां, व कैंटीन ठीक ढंग से नहीं खुलने के कारण दूध और इससे बने उत्पाद खासतौर से आइसक्रीम की मांग पर असर पड़ा है। इस तरह खपत कम हो जाने से पशुपालकों को दूध का उचित भाव नहीं मिल रहा है।
कोरोना के कहर से पहले से पहले खुले बाजार में पशुपालकों को जहां एक किलो दूध का भाव 44 रुपये मिलता था, वहां देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान दूध का भाव 30 रुपये प्रति किलो तक गिर गया था। हालांकि अनलॉक होने पर इस महीने दूध के दाम में थोड़ा सुधार हुआ है। लेकिन निजी डेयरी कंपनियां इस समय भी 32.33 रुपये लीटर दूध खरीद रही है।
इस बीच सरकार ने 15 फीसदी आयात शुल्क पर टैरिफ रेट कोटा के तहत 10 हजार टन मिल्क पाउडर का आयात करने की अनुमति दी है। विदेशों से सस्ता मिल्ड पाउडर आयात होने से दूध की खपत पर और असर पडऩे की संभावना है। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक डॉ. आर.एस. सोढ़ी इसे असमय लिया गया फैसला बताया है। उनका कहना है कि दूध उत्पादन की लागत भारत में विदेशों से ज्यादा है। इसलिए मिल्क पाउडर आयात का प्रभाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।
डेयरी उद्योग कोराना काल में खपत से ज्यादा जो दूध बचता है, उसका इस्तेमाल मिल्ड पाउडर और घी बनाने में कर रहा है। मिल्क पाउडर की सप्लाई ज्यादा होने से दूध के दाम पर दबाव बना हुआ है।

Subhash Raj
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned