मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की गणना शुरू

सरिस्का में फेज-4 गणना शुरू



जयपुर
सरिस्का के वनों में वन्यजीवों की गणना आज से शुरू हुई। सरिस्का में हर साल दिसम्बर में वन्यजीवों की गणना की जाती हैं। जिसमें मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की गणना शुरू की गई हैं। यह गणना दो चरणों में होगी। जिसमें आज से पहले चरण में मांसाहारी वन्यजीवों की गणना हो रही है। यह गणना 13 दिसम्बर तक चलेगी। इसके बाद दूसरे चरण में शाकाहारी वन्यजीवों की गणना की जाएगी। जो 14 से 17 दिसम्बर तक चलेगी। वन्यजीवों की हो रही यह सालाना गणना वन की सभी बीट में की जा रही हैं। यह गणना ट्रांजिट पद्धति से हो रही है। जिसमें वन्यजीवों की गणना के लिए जमीन व पत्थर से खरोंच के निशान,पगमार्ग,शिकार,आवाज,मल मूत्र आदि के निशान लेकर गणना का रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया जाएगा।
2015 से बंद हुई वाटर हॉल गणना
वन्यजीवों की गणना के लिए वन विभाग दो पद्धति अपनाता है। एक पद्धति वाटर हॉल गणना होती है और दूसरी पद्धति में
ट्रांजिट लाइन गणना की जाती हैं। सरिस्का में साल 2015 से पहले वाटर हॉल गणना पद्धति से वन्य जीवों की गणना की जाती थी। वाटर हॉल गणना के तहत वन विभाग साल में एक बार वन्य जीवों की गणना कराता है। यह गणना ज्येष्ठ महीने की चांदनी रात में ही होती है। यह गणना 24 घंटे तक रात दिन चलती हैं। जब चांदनी रात में वन कर्मी वन क्षेत्र में ही रुक कर वन्यजीवों की गणना करते हैं। लेकिन एनटीसीए ने इस वाटर हॉल की गणना को सही नहीं मानते हुए बाघ परियोजनाओं में वाटर हॉल गणना पर पर रोक लगा दी। जिसके बाद से यह ट्राजिट गणना शुरू हुई। इस ट्रांजिट गणना में बीट बनाकर गणना की जाती है। इसमें हर बीट में डेढ़ से दो किलोमीटर की ट्रांजिट लाइन है जहां पर वन्यजीवों पर आवाजाही अधिक होती हैं। जिस पर चलकर जमीन व पत्थर से खरोंच के निशान,पगमार्ग,शिकार,आवाज,मल मूत्र के निशान और ट्रैप कैमरे के आधार पर गणना की जाती हैं।

HIMANSHU SHARMA Desk
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