जजों की नियुक्ति मामले में केंद्र ने न्यायपालिका को दिखाया आईना

केंद्र सरकार ( Central Government ) ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले ( Appointment of Judges ) में न्यायपालिका पर पलटवार ( Hit back at judiciary ) करते हुए सोमवार को कहा कि कॉलेजियम की ओर से भेजे गए नामों पर सरकार की ओर से की जाने वाली देरी का आरोप लगाने से पहले ( Before being accused of delay by the government ) उच्च न्यायालयों में सुधार की जरूरत ( High courts need to be reformed ) है। ( Jaipur News )

 

By: sanjay kaushik

Updated: 18 Feb 2020, 01:55 AM IST

-कहा, सरकार पर देरी का आरोप लगाने से पहले अपना घर रखें दुरुस्त

-जस्टिस कौल व जस्टिस जोसेफ की पीठ से कहा...हाईकोट्र्स में सुधार की जरूरत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ( Central Government ) ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले ( Appointment of Judges ) में न्यायपालिका पर पलटवार ( Hit back at judiciary ) करते हुए सोमवार को कहा कि कॉलेजियम की ओर से भेजे गए नामों पर सरकार की ओर से की जाने वाली देरी का आरोप लगाने से पहले ( Before being accused of delay by the government ) उच्च न्यायालयों में सुधार की जरूरत ( High courts need to be reformed ) है। ( Jaipur News )

-100 दिन पर सवाल...हाईकोर्ट लेता पांच साल

न्यायपालिका को पहले अपना घर दुरुस्त रखने की सलाह देते हुए अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश के.एम. जोसेफ की पीठ से कहा कि पहले उच्च न्यायालयों में सुधार की जरूरत है। शीर्ष अदालत सरकार पर सवाल उठाती है कि उसने एक नाम पर मुहर लगाने में 100 दिन का समय लगा दिया, लेकिन, जब हाईकोर्ट जजों की नियुक्तियों के लिए नाम भेजने में पांच साल का समय लगाता है तो इसका क्या?

-चार्ट पेश...आईबी की रिपोर्ट 127 दिन में

पीठ ने उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक नियुक्तियों की समय सीमा को एक चार्ट के माध्यम से दिखाने को कहा था। वेणुगोपाल ने एक चार्ट पेश किया, जिसके अनुसार, एक जज की नियुक्ति के लिए खुफिया ब्यूरो की एक रिपोर्ट मिलने में 127 दिन का समय लग रहा है।

-कॉलेजियम की प्रक्रिया में 119 दिन

जब पीठ ने आईबी की रिपोर्ट में ज्यादा समय लगने पर ङ्क्षचता व्यक्त की तो वेणुगोपाल ने जवाब दिया कि अधिकारियों को इन रिपोर्ट को लेकर क्यों दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को अपनी खुद की प्रक्रिया में 119 दिन का समय लगता है, जबकि सारी रिपोर्ट उपलब्ध रहती है। उल्लेखनीय है कि कॉलेजियम के मुद्दे पर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच काफी अरसे से एक टकराव सा है। सरकार जजों की नियुक्ति पूरी तरह से अपने हाथ में रखना चाहती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जजों की नियुक्तियां कॉलेजियम के जरिए सिफारिश के आधार पर ही की जानी चाहिए।

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