chandrayaan 2: हैरान कर देंगी चांद की रहस्यमयी परतें

chandrayaan 2: हैरान कर देंगी चांद की रहस्यमयी परतें
chandrayaan 2: हैरान कर देंगी चांद की रहस्यमयी परतें

Sangeeta Chaturvedi | Updated: 07 Sep 2019, 11:32:14 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

chandrayaan 2: हैरान कर देंगी चांद की रहस्यमयी परतें

chandrayaan 2: भले ही चंद्रयान-2 में इसरो अपने मिशन से महज दो कदम दूर रह गया। लेकिन उम्मीदें अभी भी कायम हैं... मून मिशन के जरिये इसरो ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। चांद से 2.1 किलोमीटर की दूरी तक लैंडर से संपर्क बना रहा था। इसके बाद वैज्ञानिक लैंडर से दोबारा संपर्क नहीं साध पाए। अब बात करते हैं चांद की, जो हमेशा ही हमें लुभाता रहता है... कहीं इसका जिक्र कवियों की कल्पनाओं में होता है, तो कहीं खूबसूरती के लिए.. इसका जिक्र पौराणिक कथाओं में है, तो ये पूजा पाठ से भी जुड़ा है... बात करते हैं सियासत की तो चांद सियासत से भी अछूता नहीं सौ देशों के बीच 1967 की संधि के मुताबिक कोई भी देश चांद पर अपना दावा नहीं कर सकता। मगर वहां मौजूद बहुमूल्य खनिजों की वजह से देशों के बीच आगे निकलने की होड़ भी है। लेकिन आपको चांद से जुड़ी ये बातें पता नहीं होंगी, जो वाकई रोचक और दिलचस्प हैं...


दशकों के अध्ययन के बाद चांद का प्रत्येक नया मिशन नई जानकारियां जुटाने में कामयाब हो रहा है...चंद्रयान-1 और जापान के सेलेन यान ने चांद पर पानी समेत कई खनिजों का पता लगाया यह भी नई जानकारी मिली कि चांद के जिस हिस्से पर सूरज की रोशनी नहीं पड़ती है, वहां बर्फ मौजूद है चांद पर जीवन भी हो सकता है... चांद पर पानी मिलने के संकेत मिल रहे हैं। अगर वहां बर्फ ीले पानी की बड़ी झीलें मिलती हैं, तो यह बड़ी सफलता होगी। इससे चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की योजना को मजबूती मिलेगी क्योंकि पृथ्वी से पानी ले जाना बहुत महंगा पड़ेगा।


कब जन्मा था चांद
वैज्ञानिकों के मुताबिक चांद का जन्म करीब 450 करोड़ साल पहले हुआ था। इस बारे में थ्योरी है कि एक विशाल गृह थियाज के पृथ्वी से टकराने पर चांद का जन्म हुआ था। चांद के चट्टानी टुकड़ों पर थिया नाम के ग्रह की निशानियां दिखती हैं।


चांद पर कभी बहता था लावा
-200 करोड़ साल पहले चांद भौगोलिक रूप से सक्रिय था
-चांद उस समय मैग्मा (लावा) से पूरी तरह से ढंका हुआ था
-मगर अब चांद पर पानी-बर्फ के कुछ ही निशान दिखते हैं
-अब चांद पूरी तरह से धूल और पत्थरों से ढंका हुआ है


दूरी कम
- 3,84,000 किलोमीटर दूरी है चांद और धरती के बीच
-1-2 सेकंड में भी चांद पर रेडियो संपर्क स्थापित हो जाता है


गुरुत्वाकर्षण कम
- चांद पर गुरुत्वाकर्षण कम
ऑर्बिटर्स और लैंडर्स के लिए हो जाता है काम आसान


पृथ्वी के नए राज खुलेंगे
चांद से हमारे सौर मंडल के बारे में भी खुल सकते हैं कुछ नए राज


चांद पर छिपा है बेशकीमती धातुओं का खजाना
- हिलियम-3 का खजाना छिपा है चांद पर
- परमाणु कार्यक्रम के लिए हिलियम-3 को माना जाता है बहुत अहम

बेशकीमती धातुओं का भी भंडार
-चांद की चट‌्टानों पर संकेत मिले हैं सल्फर मिलने के
- एक शोध के मुताबिक चंद्रमा पर मूल्यवान धातु प्लेटिनम और प्लाडियम का भंडार
-चांद के आवरण पर मैग्निशियम और सिलिकॉन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध
-चांद की बाहरी और भीतरी सतह पर आयरन मौजूद


जानें चांद से जुड़ी अहम बातें
- 150 से ज्यादा चांद हैं ब्रहृमांड में
-32,000 ईसा पूर्व के कैलेंडर में भी चांद का जिक्र

इतने बड़े गड्ढे कि पूरा एवरेस्ट समा जाए
-लाखों क्रेटर हैं चांद की सतह पर
-5185 क्रेटर (गड्ढे) चांद पर जिनकी चौड़ाई 20 किलोमीटर से भी ज्यादा
-साउथ पोल एटकिन बेसिन सबसे बड़ा क्रेटर है चांद पर
-2500 किलोमीटर में फैला है यह क्रेटर, 13 किलोमीटर गहराई है इसकी
-यह इतना गहरा है कि पूरा माउंट एवरेस्ट इसमें समा सकता है

धरती से कितनी दूर
-30 पृथ्वी के बराबर औसतन दूरी है चांद की धरती से
-3,84,400 किलोमीटर दूर है चांद धरती से
-पृथ्वी के चक्कर लगाते समय चांद धरती की बराबर गति से ही घूमता है
-इस वजह से चांद की एक ही साइड हमेशा धरती की ओर होती है

चांद की प्रमुख आठ कलाएं

1. अमावस्या (न्यू मून) : यह चरण तब होता है जब चांद पृथ्वी और सूरज के बीच आता है। सूर्य के सबसे करीब होने की वजह से हम इसे देख नहीं पाते।
2. वर्धमान चांद (वैक्सिंग क्रिसेंट): आसमान में जब सूर्य पूर्व की ओर बढ़ता है, तब यह स्थिति होती है। इस चरण में हमें चांद की एक बारीक सी रेखा दिखने लगती है।
3. अर्धचंद्र (फस्र्ट क्वार्टर) : अमा वस्या के करीब सात दिन बाद चांद पृथ्वी के बगल में आ जाता है। इस स्थिति में हमें आधा चांद दिखने लगता है।
4. कुबड़ा चांद (गिबस मून) : इस स्थिति में चांद का काफी सारा हिस्सा हमें देखने को मिलता है। गिबस का मतलब बढऩा होता है।
5. पूर्णिमा (फुल मून) : अमावस्या के करीब दो हफ्ते बाद पृथ्वी चांद और सूरज के बीच आ जाती है। इससे हमें पूरा चमकता चांद देखने को मिलता है।
6. कुबड़ा चांद (गिबस मून) : पूर्णिमा के बाद चांद सूर्य के करीब पहुंचने लगता है, जिससे हमें वो घटता नजर आता है।
7. अर्धचंद्र (थर्ड क्वार्टर) : चांद वापस से पृथ्वी के बगल आ जाता है। अब तक चांद अपनी कक्षा का तीन चौथाई हिस्सा पार कर चुका होता है।
8. वर्धमान चांद (वेनिंग क्रिसेंट मून) : यह चांद के सफर का आखिरी चरण होता है।

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