JLF 2018: चेतन भगत ने कहा- यदि राजस्थान में पद्मावत रिलीज होती, तो इतनी भीड़ हमें नहीं मिलती

JLF 2018: चेतन भगत ने कहा- यदि राजस्थान में पद्मावत रिलीज होती, तो इतनी भीड़ हमें नहीं मिलती

kamlesh sharma | Updated: 27 Jan 2018, 09:39:04 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

चारबाग में हुए 'गो योर ऑन वे: पेन टू पब्लिश' सेशन में चेतन भगत ने कहा कि 2004 में पहली बुक लिखी थी, तब फेसबुक और सोशल मीडिया नहीं था।

अनुराग त्रिवेदी/ जयपुर। 'कमर्शियल और इंटवलैक्चवल शब्द कास्टिज्म की तरह है, इनमें विश्वास नहीं करता। रीडर मेरे लिए भगवान की तरह है और कभी कमर्शियल सोच के साथ बुक नहीं लिखता। मेरी बुक को बिल गेट्स ने भी लिया है और थॉमस भी इसे पढ़ा है, एेसे में इन लोगों को कमर्शियल बोला जाए तो कैसा लगेगा'। यह कहना है, राइटर चेतन भगत का।

शनिवार को चारबाग में हुए 'गो योर ऑन वे: पेन टू पब्लिश' सेशन में चेतन भगत ने कहा कि 2004 में पहली बुक लिखी थी, तब फेसबुक और सोशल मीडिया नहीं था। तब किताब की मार्केटिंग और प्रमोशन के लिए इस तरह के हथियार नहीं थे। उस समय ब्लॉग सबसे ज्यादा ट्रेंड में चलता था और मैंने भी इसी माध्यम में अपनी बात कही।

लोगों को ब्लॉग के जरिए अपनी बुक और विचार साझा किया, जिसका परिणाम था कि लोग इसकी माउथ पब्लिसिटी करने लगे। आज नया राइटर ऑनलाइन माध्यम में अपनी बुक पब्लिश करवा सकता है और सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रचार कर सकता है। अपनी बुक के बारे में अनुभव शेयर करने के लिए विभिन्न शहरों की स्कूलों में बच्चों के पास जाना चाहिए, ताकिं वे आपके लिखे विचारों से जुड़ पाएं।

उन्होंने सत्र की शुरुआत में कहा कि बहुत दिनों बाद कुछ अच्छा सवाल किया गया है, नहीं तो अब तक लोग सिर्फ 'पद्मावती' से जुड़े सवाल ही पूछ रहे है। मजाक में बोलते हुए चेतन ने कहा कि यदि यहां 'पद्मावत' रिलीज होती, तो इतनी भीड़ हमें नहीं मिलती। सेशन में रश्मि बंसल, सुंदरी वेंकटरमनएवं विनित वाजपेयी, सुधा सदानंद के साथ संजीव झा रूबरू ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान पेन टू पब्लिश के विजेता सुधा नायर और जे. एकलेम को 10-10 लाख रुपए का चैक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

फिल्म से राजपूतों के शान में कमी नहीं आएगी
मीडिया से बात करते हुए लेखक चेतन भगत ने कहा कि राजपूतों की शान सदियों से है, उन्हें एक फिल्म के कारण इस तरह विरोध-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए, जिससे विश्व में भारत की छवि धूमिल हो।

यूं तो कई लोग भगवान को भी कुछ भी कह देते हैं, लेकिन इस तरह का कोई बवाल नहीं होना चाहिए कि तोडफ़ोड़ की जाए या बच्चों को डराया जाए। एक फिल्म से इनकी शान में कमी नहीं आएगी। यह सही है कि फिल्मों को लेकर देश में राजनीति होती रही है और 'पद्मावत' फिल्म में भी यह देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई फिल्म से नाराज है, तो मिल बैठकर रास्ता निकालना चाहिए। हर किसी को कहानी लिखने, कहने और दिखाने का हक है। कुछ लोग सोशल मीडिया और ब्लॉग के जरिए शोर मचाते रहते हैं।

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