नन्हें-मुन्नों का इंतजार बढ़ा, पता नहीं कब नसीब होगी मां की गोद?

- करीब दो महीने से रुका हुआ दत्तक ग्रहण का काम, हर महीने गोद जाते थे 3-4 बच्चे
- नवजात बच्चों की बढ़ रही आयु

By: Jaya Gupta

Published: 10 May 2020, 11:06 AM IST

जया गुप्ता


जयपुर। कोरोना संकटकाल का असर नवजात अनाथ शिशुओं पर भी पड़ रहा है। मां की गोद पाने के लिए उनका इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल, पिछले करीब दो महीने से दत्तक ग्रहण का कार्य बंद हैं। मार्च महीने की शुरुआत में ही गांधी नगर स्थित शिशुगृह से बच्चे गोद दिए गए थे। उसके बाद केंद्रीय दत्तक ग्रहण एजेंसी (कारा) ने दत्तक ग्रहण पर रोक लगा दी। तब से दत्तक ग्रहण की पूरी प्रकिया ही रुक गई। शिशुगृह में पांच बच्चे विदेश में गोद दिए जाने हैं। जिनकी परिजनों से ऑनलाइन मैचिंग भी हो चुकी है। वहीं वर्तमान में करीब 17 नवजात बच्चे (एक साल से छोटे) शिशुगृह में रह रहे हैं। इनमें से ज्यादातर दत्तक ग्रहण दिए जा सकते हैं। गौरतलब है कि अभी तक हर महीने करीब 3-4 बच्चे गोद दिए जा रहे थे। यानी की इन दो महीनों करीब 7-8 बच्चे गोद चले जाते। मासूमों को परिवार में जाने के लिए पता नहीं अभी कितना इंतजार करना पड़ेगा?
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छह महीने से कम उम्र की बच्चे पहली पसंद
कारा गोद लेने वाले परिजनों का डेटा रखती है। परिजनों की पहली पसंद छह महीने से कम उम्र के बच्चे होते हैं। कोरोना काल में बच्चों की उम्र लगातार बढ़ती जा रही है। पहले जहां बच्चे छह महीने की आयु पूरी करने से पहले ही परिवार में ही पहुंच जाते थे, अब प्रकिया में देरी हो रही है और बच्चों की उम्र बढ़ रही है। इसके साथ ही शिशुगृह के स्टॉफ के लिए इतने सारे छोटे बच्चों को एक साथ संभालना कठिनाई भरा हो रहा है। एक साल से छोटे बच्चों को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है।
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सामान्यत: तीन-चार महीने में परिवार में पहुंच जाता है बच्चा
सड़क, पालना गृह आदि में छोड़े जाने के तीन-चार महीने के भीतर एक बच्चा अपने परिवार में पहुंच जाता है। दत्तक ग्रहण एजेंसी कारा के नियमानुसार दो साल से कम आयु के बच्चे को दो महीने या साठ दिन से कम समय में कानूनी रुप से फ्री करना होता है। कानूनी रुप से फ्री करने के लिए स्थानीय अखबार में बच्चे का विज्ञापन दिया जाता है। जब कोई व्यक्ति बच्चे के लिए क्लेम नहीं करता तो बाल कल्याण समिति बच्चे को कानूनी फ्री कर देती है। उसके बाद बच्चा का दत्तक ग्रहण किया जा सकता है। बच्चे का विवरण कारा की वेबसाइट पर ऑनलाइन डाल दिया जाता है। कारा के पास बच्चा चाहने वाले परिजनों की सूची भी होती है। परिजनों के अनुसार उन्हें बच्चे का विवरण ऑनलाइन भेजा जाता है। बच्चे का चयन कर माता-पिता उसे मैच करते हैं। इस प्रकिया में 15-20 दिन का समय लगता है। कारा मैचिंग का ब्यौर संबंधित दत्तक ग्रहण एजेंसी व माता-पिता को भेजती है। माता-पिता एजेंसी में आकर वास्तविक दस्तावेज दिखाते हैं। उसके बाद प्री दत्तक ग्रहण की बैठक होती है। जिसके बाद बच्चे को गोद दिया जाता है। कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए कोर्ट में आवेदन कर दिया जाता है। यानी की लगभग तीन-चार महीने में बच्चा अपने माता-पिता के पास पहुंच जाता है।
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वर्जन -
- कारा ने 31 मई तक दत्तक ग्रहण प्रकिया पर रोक लगाई है। कारा के निर्देशानुसार ही आगे की कार्यवाही करेंगे। काफी बच्चे दत्तक ग्रहण के लिए तैयार हैं। मैचिंग कारा ही ऑनलाइन करवाता है।
- किरण पंवार, अधीक्षक, शिशुगृह
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Jaya Gupta Reporting
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