बच्चें आज भी पढ़ने के लिए रोज मौत के मुंह से गुजर रहे

Kamlesh Agarwal

Updated: 14 Jul 2019, 11:28:53 AM (IST)

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

प्रदेश में चाहे कोई भी सरकार रही है। उनके लिए सरकारी स्कूल वादों में तो प्राथमिकता रहे है, लेकिन स्कूल को लेकर किए गए वादों की हकीकत कुछ ओर ही हैं। देखे राजधानी जयपुर के सरकारी विद्यालय जिसमें बच्चें आज भी पढ़ने के लिए रोज मौत के मुंह से गुजर रहे है।


यह कहानी है राजधानी जयपुर से मात्र 15 किलोमीटर दूर एक गांव की। जहां स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने जाने के लिए नौनिहालों को रोजाना मौत के मुंह से गुजरना पड़ता हैं। जी हां हम जयपुर जैसे इलाके की ही बात कर रहे हैं जहां आमेर के शीशा वास गांव के बच्चें यहां स्थित घने जंगल से होते हुए रोज पहाड़ पर चढ़कर पांच किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल पहुंचते है। हालात यह है कि अभिभावकों से लेकर गांव के हर इंसान को रोजाना चिंता जब तक बनी रहती है तब तक उनके बच्चें वापस घर तक नहीं पहुंच तो। बच्चों से लेकर सबको भय रहता है कि कही जंगली जानवर नौनिहालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा दे। कई बार तो हाल यह होता है कि बच्चों को पैंथर जैसे जानवर रास्ते में दिख जाते है लेकिन बच्चें अपनी सूझबूझ से घर पहुंच जाते ही है।
मौके पर जाकर इस भयावह स्थिति को जाना तो उनके भी रोंगटे खड़े हो गए। बच्चों के साथ सफर तय कर किया उनके साथ होते हुए आमेर गांधी चौक स्थित स्कूल तक पहुंचे। इस दौरान लगा कि स्कूल का यह सफर बच्चों के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण है। इस सफर को तय करने में इनको करीब 2 घंटे लगते हैं थकान के कारण बच्चोंं को रास्ते में आराम तक करना पड़ता हैं। बच्चों को स्कूल समय पर पहुंचने के लिए एक घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है तब जाकर वो सही समय पर स्कूल में पहुंच पाते हैं।


इसी से आप दूर दराज के इलाकों बने स्कूल के हालात का अनुमान लगा सकते हैं...साथ ही आप खुद समझ सकते हैं करोड़ों रुपए का शिक्षा का बजट खर्च कहां हो रहा है

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