मातृभाषा में तालीम लेने से वंचित बच्चे


नवक्रमोन्नत स्कूलों में समाप्त हुए उर्दू शिक्षकों के पद
अब अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को पढऩी होगी संस्कृत
बिना प्रस्ताव विभाग ने समाप्त कर दिए पद

By: Rakhi Hajela

Updated: 07 Nov 2020, 04:16 PM IST

मातृभाषा में तालीम लेने से वंचित बच्चे
नवक्रमोन्नत स्कूलों में समाप्त हुए उर्दू शिक्षकों के पद
अब अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को पढऩी होगी संस्कृत
बिना प्रस्ताव विभाग ने समाप्त कर दिए पद

पहले शाला दर्पण पोर्टल पर उर्दू किताबों की मांग समाप्त करने के अब शिक्षा विभाग स्कूलों से भी उर्दू को समाप्त करने में लगा हुआ है। हाल ही में विभाग में क्रमोन्नत किए गए ऐसे स्कूल जिनमें तृतीय भाषा के रूप में अब तक उर्दू पढ़ाई जा रही थी, वहां उर्दू शिक्षकों के पद समाप्त कर संस्कृत को तृतीय भाषा के रूप में लागू कर दिया गया है।
वह भी तब जबकि इस संबंध में विभाग को कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया। शिक्षा विभाग के इस निर्णय से प्रदेश के स्कूलों में पढ़ रहे अल्पसंख्यक समुदाय के वह बच्चे जो उर्दू पढ़ रहे थे उन्हें संस्कृत पढऩे पर मजबूर होना होगा।
खतरे में मातृभाषा पढऩे का अधिकार
गौरतलब है कि विभाग के इस निर्णय से उर्दू भाषी विद्यार्थियों का मातृभाषा में पढऩे का अधिकार खतरे में है। उर्दू भाषायी अल्पसंख्यक मातृभाषा है और राज्य के करीब २० हजार सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाती रही है ,लेकिन धीरे धीरे स्कूलों से इसे समाप्त किया जा रहा है।

राजधानी जयपुर की स्थिति
कांग्रेस विधायक अमीन कागजी के किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के तहत राजकीय माध्यमिक विद्यालय नाहरवाड़ा, रामगंज को हाल ही में २९ अक्टूबर को क्रमोन्नत किया गया है। इस स्कूल में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर उर्दू चलती थी। एक उर्दू माध्यम से स्कूल को भी इसमें मर्ज किया गया था। स्कूल में शतप्रतिशत नामांकन अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों का है,जो उर्दू पढ़ रहे थे लेकिन यहां से उर्दू समाप्त कर दी गई है। स्कूल में तृतीय भाषा के रूप में ८वीं तक उर्दू चल रही थी और अब ९वीं में विद्यार्थियों को संस्कृत पढऩी होगी। लेकिन कैसे इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
इसी प्रकार राजकीय माध्यमिक विद्यालय रामगंज में तृतीय भाषा के रूप में उर्दू संचालित है। स्कूल में छठीं से ९वीं तक १०२ बच्चों का नामांकन है इसमें से ९९ विद्यार्थी उर्दू पढ़ते हैं लेकिन हाल में हुई क्रमोन्नति में स्कूल से उर्दू का पद समाप्त कर दिया गया। ऐसे में स्कूल की एसएमसी की बैठक में स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक उर्दू तृतीय भाषा का पद सृजित किए जाने की मांग की गई।
इसी प्रकार विधायक महेश जोशी के विधानसभा क्षेत्र स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय राजीव नगर भट्टा बस्ती को क्रमोन्नत तो किया गया लेकिन यहां से भी उर्दू शिक्षक के पद बिना प्रस्ताव समाप्त कर दिए गए। राजकीय माध्यमिक विद्यालय मछलीवालान की भी कुछ ऐसी स्थिति हुई है।
इसी प्रकार प्रताप सिंह खाचरियावास के सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में राजकीय माध्यमिक विद्यालय लंकापुरी भट्टा बस्ती से भी उर्दू समाप्त कर दी गई। अगर राजधानी जयपुर के बाहर की भी बात करें तो बाड़मेर राजकीय माध्यमिक विद्यालय बड़ी खड़ीन गडरा रोड विधानसभा क्षेत्र शिव से और जैसलमेर में राजकीय माध्यमिक विद्यालय थाट पोकरण से भी उर्दू को समाप्त कर बच्चों पर संस्कृत थोप दी गई।
इनका कहना है,
अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मातृभाषा में तालीम लेने से वंचित किया जा रहा है। स्कूलों को उर्दू भाषा से शून्य करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में रोष है। शिक्षा विभाग को अपने इस निर्णय पर पुन विचार करना चाहिए।
अमीन कायमखानी,
प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ।

Rakhi Hajela Desk
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