आवासीय की आड़ में व्यवसायिक निर्माण निगम ने सीज की दो हवेलिया

आवासीय की आड़ में व्यवसायिक निर्माण निगम ने सीज की दो हवेलिया
आवासीय की आड़ में व्यवसायिक निर्माण निगम ने सीज की दो हवेलिया

Kamlesh Agarwal | Updated: 11 Oct 2019, 12:07:58 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

आवासीय की आड़ में व्यवसायिक निर्माण निगम ने सीज की दो हवेलिया

जयपुर।


नगर निगम ने आखिरकार आज शहर में बड़ी कार्रवाई करते हुए आवासीय निर्माण की आड़ में पुरानी हवेली की जगह व्यवसायिक भवन निर्माण पर कार्रवाई की। निगम ने हवामहल जोन पूर्व में ठाकुर पचेवर के रास्ता रामगंज बाजार और चौकड़ी गंगापोल में सेठ कृपाराम की हवेली को सीज कर दिया। निगम ने दोनों भवनों को आवासीय में व्यवसायिक निर्माण पर सीज किया है। नगर निगम ने खुद अपने स्तर पर हाईकोर्ट में एक सूची पेश की है जिसमें करीबन 365 हवेलियों का हवाला दिया है जो व्यवसायिक भवनों में बदल चुके हैं। जिसके बाद हाईकोर्ट ने पुराने निर्माण पर कार्रवाई के साथ नए अवैध निर्माण रोकने के आदेश दिए हैं।


नगर निगम हवामहल जोन पूर्व के अधिकारियों के साथ सर्तकता दस्ते ने आज सुबह चौकड़ी गंगापोल में सेठ कृपाराम की हवेली और रामगंज बाजार में ठाकुर पचेवर के रास्ते में एक हवेली को सीज कर दिया। दोनों ही जगह पर आवासीय की आड़ में व्यवसायिक निर्माण किया जा रहा था। निगम ने अवैध निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी किया था लेकिन इसके बाद भी निर्माण नहीं रोकने पर आज निगम ने दोनों भवनों को 180 दिन के लिए सीज कर दिया। आपको बता दे कि शहर में बीते काफी समय से आवासीय की आड़ में अवैध व्यवसायिक निर्माण किया जा रहा है निगम ने बीते दिनों एक पत्र याचिका पर सुनवाई के दौरान करीबन 365 भवनों की सूची सौंपी थी जिसमें कहा था इनमें अवैध व्यवसायिक निर्माण किए गए हैं जिसके बाद हाईकोर्ट ने पहले चरण में 19 भवन के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था और इसके बाद 12 और फिर 112 भवनों पर कार्रवाई होनी है लेकिन निगम ने अभी तक किसी भी भवन के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।

उपायुक्त जिम्मेदार
नगर निगम के अवैध व्यवसायिक भवन बनने की लगातार शिकायतें आ रही थी इसी के बाद निगम आयुक्त ने एक आदेश जारी किया था जिसमें किसी भी तरह के अवैध निर्माण के लिए पूरी तरह से जोन उपायुक्त को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके बाद भी निगम ने खुद माना कि करीबन 365 अवैध व्यवसायिक भवन तैयार हो गए हैं लेकिन किसी भी निगम अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

निगम ने माना अवैध कॉम्पलैक्स हुए तैयार

नगर निगम ने एक पत्र याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एक सूची पेश की है जिसमें माना है कि करीबन 365 पुरानी हवेलिया और भवन अब व्यवसायिक भवनों में बदल चुके हैं। जो पूरी तरह से अवैध है और आवासिय की आड़ में निर्माण किया गया है।

काटनी चाहिए बिजली पानी

सुप्रीम कोर्ट ने लेखराज सोनी बनाम राज्य सरकार के मामले में आदेश दिया था कि जो अवैध निर्माण है या बिना अनुमति आवासीय परिसर में व्यवसायिक निर्माण किए गए हैं उन परिसर की बिजली पानी के कनेक्शन काटे जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आज तक नगर निगम के इन भवनों के बिजली पानी कनेक्शन काटने की पहल नहीं की है।

खत्म हुआ शहर का हेरिटेज स्वरूप

नगर निगम की लापरवाही की वजह से शहर का हेरिटेज स्वरूप करीबन समाप्त हो गया है। शहर को दस चौकड़ी में बांटा गया था लेकिन निगम अधिकारियों की अनदेखी की वजह से अब इसका हेरिटेज स्वरूप खोने के साथ ही सकड़ी गलियों में बने भवनों की जगह बहुमंजिला व्यवसायिक भवन तैयार हो गए हैं। जिनमें ना पार्किंग की जगह है ना ही किसी तरह का हादसा होने पर एंबूलेंस या फायर बिग्रेड पहुंचने की जगह है।

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