दुष्कर्म रोकने में समाज की भागीदारी भी जरूरी

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के सेंट्रल डिटेक्शन ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की ओर से गुरुवार को राजस्थान पुलिस अकादमी के सभागार में ‘परसेप्शन मैनेजमेंट एंड कैपेसिटी बिल्डिंग ऑन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस-2018’ विषय पर सेमीनार का आयोजन किया गया।

By: Lalit Tiwari

Published: 07 Jun 2018, 10:51 PM IST

दुष्कर्म रोकने को समाज के लोगों की भागीदारी भी जरूरी
सिटी रिपोर्टर
जयपुर ७ जून
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के सेंट्रल डिटेक्शन ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की ओर से गुरुवार को राजस्थान पुलिस अकादमी के सभागार में ‘परसेप्शन मैनेजमेंट एंड कैपेसिटी बिल्डिंग ऑन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस-2018’ विषय पर सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार में मुख्य अतिथि महानिरीक्षक अपराध हरिप्रसाद शर्मा ने कहा की दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध की रोकथाम के लिए समाज और नेतृत्व कर्ताओं को जागरुक करना होगा। बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती शहरीकरण अपराध का मुख्य कारण है। उन्होंने अपराधों के संबंध में दर्ज होने वाले विभिन्न मुकदमों के बारे में जानकारी दी। शर्मा ने कहा कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों के अनुसंधान का सही व निष्पक्ष रुप से अनुसंधान करना चाहिए और निर्दोष व्यक्ति को बचाना चाहिए। दुष्कर्म जैसे अपराधों की सजा कठोर होनी चाहिए तथा जुर्माना राशि भी अधिक होनी चाहिए। न्यायालय में भी ठोस सबूतों के साथ मुकदमे पेश करने चाहिए। सेमीनार के दोनों सत्रों में वक्ताओं ने पैनल डिस्कशन में अपने विचार व्यक्त किए। विचारों के अनुसार केवल कानून बना देने से ही अपराधों पर रोकथाम संभव नहीं है। इसके लिए सामूहिक रूप से प्रयास किए जाने चाहिए। गवाहों को पूरी सुरक्षा व अपराधों की रोकथाम के लिए बच्चों को शुरू से ही नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए। वर्तमान में साइबर अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जनचेतन जागृत के कार्यक्रम आयोजित किए जाने व स्कूल सिलेबस में की साईबर अपराधों के बारे में जानकारी दिये जाने की आवश्यकता बताई गई। सेमीनार में वक्ताओं ने साईबर अपराधों की रोकथाम के लिये स्पेशल टास्क फोर्स के गठन, साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाने के साथ ही सोशल मीडिया के उपयोग के लिए गाइडलाइन जारी करने की आवष्यकता जताई। अन्य वक्ताओं ने घरेलू हिंसा कानून के तहत महिलाओं को पूरी सुरक्षा उपलब्ध करवाने का सुझाव दिया।
सेमीनार में दो सत्रों में पैनल डिस्कशन किया गया। प्रथम सत्र में ’’लीगल फॉॅर्मेट्स फॉर ए सेफर सोसाइटी फॉॅर वुमन’’ विषय पर मॉडरेटर टीवी एंकर डॉ अनिता हाडा तथा वक्ता एसोसिएट प्रोफेसर लॉ कॉलेज मनोज मीणा, स्वयंसेवी संस्था की प्रतिनिधि निशा सिद्धू, एडवोकेट शैलेंद्र शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर महारानी कॉलेज वंदना अग्रवाल ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।
दूसरे सत्र में ’’अंडरस्टैंडिंग द विक्टिम एंड द एक्यूज्ड फॉर ए होलिस्टिक जस्टिस’’ विषय पर मॉडरेटर सेवानिवृत्त आईएएस एस.एस. बिस्सा तथा वक्ता पूर्व अध्यक्ष महिला आयोग लाड कुमारी जैन, उपप्राचार्य लॉ कॉलेज डॉ अभिषेक तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर महारानी कॉलेज डॉ. एकता मीणा एवं साइकोलोजिस्ट डॉ. अनामिका पापडीवाल ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।

Lalit Tiwari Desk
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