29 की दिल्ली रैली के बाद राजस्थान में बदलेगा राजनीतिक समीकरण! पार्टियां झौंक रही पूरी ताकत

भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पर असमंजस...

By: dinesh

Published: 25 Apr 2018, 10:01 AM IST

जयपुर। विधानसभा चुनाव लगभग सिर पर है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान में भी भाजपा-कांग्रेस की जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो जाएगी लेकिन अभी तक दोनों ही दलों में संगठन के पदों पर नियुक्तियां अधूरी हैं।

भाजपा में प्रदेश नेतृत्व को लेकर ही घमासान मचा हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर अपनी पसंद के व्यक्ति की नियुक्ति को लेकर खींचातान चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अध्यक्ष अपनी पसंद के लोगों को जिलों सहित कई स्थानों पर नियुक्तियां देंगे। ऐसे में भाजपा के कार्यकर्ता असमंजस में हैं। वहीं, कांग्रेस में लंबे समय से डेढ़ दर्जन जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त नहीं हो पाए हैं। जबकि पार्टी चयन का काम पूरा कर चुकी है। सभी 400 ब्लॉक में चुनाव का काम पूरा हो चुका है लेकिन किसी न किसी कार्यक्रम की आड़ में अध्यक्षों की सूची अटक रही है। यह सूची 22 अप्रेल को आनी थी लेकिन फिर अटक गई है। माना जा रहा है अब 29 की दिल्ली रैली के बाद यह सूची जारी होगी।

दौरे और सभाएं शुरू : भाजपा की ओर से सीएम वसुंधरा राजे ने क्षेत्रों के दौरे शुरू कर दिए हैं। वह एक के बाद एक जिले में जन-सुनवाई कर रही हैं। इसे चुनावी तैयारी माना जा रहा है। कांग्रेस ने भी कोटा संभाग से मेरा बूथ-मेरा गौरव कार्यक्रम शुरू कर दिया है।

4 अक्टूबर को हुई थी चुनाव घोषणा
राज्य में पिछले विस चुनावों को देखा जाए तो राजनीतिक दलों के पास चुनाव तैयारी के लिए मात्र 5 माह बचे हैं। पिछले चुनावों के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने 4 अक्टूबर को चुनाव तिथि की घोषणा कर राज्य में आचार संहिता लागू कर दी थी। इसके बाद सरकार के सभी नए कार्यों पर रोक लग गई थी। अब अप्रेल बीतने वाला है और मई से सितंबर तक 5 माह बचे हैं।

कार्यकर्ता परेशान
दोनों ही दलों में कार्यकर्ता असमंजस में हैं कि भाजपा में प्रदेश नेतृत्व बदलने से किस जिले में क्या गणित बनेगा, कांग्रेस में जिलों और ब्लॉकों में अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद क्या समीकरण बनेंगे।

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