बसपा के नहीं, कांग्रेस के है विधायक

पहली बार कांग्रेस ने हाईकोर्ट में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र
बसपा की याचिका में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र किया पेश

By: KAMLESH AGARWAL

Published: 10 Aug 2020, 10:49 PM IST

जयपुर। बसपा के टिकट पर जीते छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती देने वाली बसपा और भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी। पहली बार कांग्रेस की ओर से बसपा की याचिका में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया गया है। प्रार्थना पत्र में राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष और मुख्य सचेतक को पक्षकार बनाने की गुहार लगायी गयी है। अधिवक्ता वरूण के चौपड़ा और अधिवक्ता शाश्वत पुरोहित के जरिए पेश किये गये प्रार्थना पत्र में कांग्रेस ने कहा है कि 18 सितंबर 2019 को एक आदेश के जरिए बसपा के सभी 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय हो गया। इसलिए अब ये सभी 6 विधायक बसपा के नहीं होकर राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के विधायक है। सभी छह विधायक कांग्रेस विधायक और सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बसपा की ओर से दायर याचिका में इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने और वोटिंग अधिकार पर रोक लगाने की गुहार कि गयी है। अगर हाईकोर्ट ऐसा आदेश देता है तो वर्तमान सरकार के लिए मुश्किल होगा। इससे कांग्रेस पार्टी और विधायक दल के हित प्रभावित होगें। इसी वजह से इस मामले में कोई भी आदेश देने से पहले कांग्रेस और मुख्य सचेतक का पक्ष भी सुना जाना चाहिए।

बसपा विधायकों ने कहा, देशभर में भाजपा ने किए हैं कई दलों का विलय


बसपा के विधायकों ने सोमवार को उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल कर दिया है। इसमें कहा है कि याचिका चलने योग्य ही नहीं है। एक ओर इसी तरह से भाजपा कई राज्यों में दलों का विलय करती रही है और यहां पर इस तरह के विलय को गलत ठहरा रही है। राज्यसभा में भी टीडीपी के चार सांसदों का इसी तरह से विलय किया गया था। जब विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायक की याचिका को तकनीकि आधार पर खारिज की है तो उनको नए सिरे से वहीं पर अपनी याचिका दायर करनी चाहिए थी। इसी वजह से याचिका चलने योग्य नही है इसे सिरे से खारिज कर देना चाहिए।
बसपा विधायकों ने मदन दिलावर की याचिका का जवाब देते हुए कहा कि याचिका अखबारों में छपी खबरों के आधार पर दायर की गई। करीबन दस महीने तक विधायक विधानसभा और उसके बाद कांग्रेसी सदस्य के तौर पर व्यवहार करते हैं इसमें किसी को आपत्ति नहीं थी। इसी के साथ मामले को विधानसभा अध्यक्ष के सामने ही रखा जाना चाहिए था क्योंकि पहले याचिका तकनीकि आधार पर खारिज हुई थी। याचिका को सही तरीके से नियमों के अनुसार अध्यक्ष के सामने पेश करने पर उसका फैसला वहीं पर संभव था। इसी के साथ याचिका में कांग्रेस को आवश्यक पक्षकार बताते हुए कहा कि बसपा का विलय कांग्रेस में हुआ है ऐसे में जब कांग्रेस को पक्षकार नहीं बनाया तो याचिका खारिज करने योग्य है।

ये उदाहरण दिए हैं

बसपा विधायकों ने अपने जवाब में उदाहरण देते हुए कहा है कि राज्यसभा में चार टीडीपी सांसदों के भाजपा में विलय को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति ने मंजूरी दी है। गोवा में कांग्रेस के 15 में से दस विधायकों का विलय किया गया है। इसी तरह से सिक्किम में एसडीएफ के 13 में से 10 विधायकों का भाजपा में विलय हुआ। गोवा में एमजीपी के 3 में से दो विधायकों को भाजपा में मिला लिया गया। अरुणाचल प्रदेश में 43 में से 33 विधायक भाजपा में आ गए। इस सब विलय को भाजपा सही बताती रही है और राज्य में बसपा विलय पर सवाल उठा रही है।

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